February 29, 2012

चल हट, ढाई ढूश...



29 फरवरी चार साल में एक बार तो आती है, वह तो कभी नहीं आता.

मुख़्तसर बातें करो बेजा वज़ाहत मत करो - डॉ. बशीर बद्र.
[ Muḵẖtaṣar - Abridged, curtailed, concise, small;  Waẓāḥat - to be clear, Clearness, purity.]


दिल टूट गया है

आओ
आधा आधा पिज्जा खाते हैं
थोड़ी सी सिंगल माल्ट पीते हैं
* * *

बेवजह की बातें
चल हट, ढाई ढूश ?
[ढाई ढूश - पारी समाप्त, खेल रद्द, सौदा ख़त्म ]

आई लव यू
माने ?
चल दारू पियेंगे और किसी को लात मारेंगे.
* * *

प्रेम कोई विलक्षण आदिम चीज़ नहीं है

यह अनवरत है
अभी खो गया है, कभी फिर मिल जायेगा.
* * *

अपने लिखे में ढल जाना

शाम ढ़लने के समय कोई छत से पुकारता है। मैं अजाने सीढियां चढ़ने लगता हूँ। छत पर कोई नहीं होता। पुकारने वाला शायद उस ओर बढ़ जाता है, जिधर सूरज डू...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.