और कुछ मौत के बाद...


बेवजह की बातें लिखना, मुहब्बत करने जैसा काम है कि हो गई है, अब क्या किया जा सकता है. पोस्ट का एंट्रो लिखना घर बसाने सरीखा मुश्किल काम...

एक दिन आदमी ने उकता कर
नफ़रत जैसी चीज़ को उछाल दिया
आसमान की ओर मगर वह लौट आई.

वह ख़ुद उछल गया
तो गिर पड़ा वहीं, जहाँ से उछला था.

फिर उस आदमी ने
कर दिया मुआफ़ उन लोगों को
जो हज़ार नफ़रतों से घिरे हुए भी जी रहे थे.
* * *

कुछ लोग ज़िन्दगी को चुनते हैं
और कसते जाते हैं चप्पू वाले लूप के हुक
नदी में उतरने से पहले.

कुछ लोग तोड़ डालते हैं अपनी नाव
और किनारे बैठ कर खेलते रहते हैं
सूरज को उगाने और डुबाने का खेल.

आखिर दोनों तरह के लोग मर जाते हैं.
* * *

एक दिन सब उबर आते हैं
तथ्यों और परिणामों के जंजाल से

कुछ मौत से पहले और कुछ मौत के बाद.
* * *
[Painting Image courtesy : Anna Bocek]

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