July 17, 2012

रह गई हो कोई बात


दो बेवजह की बातें जो पड़ी रह गई ड्राफ्ट में जैसे किसी को कहते कहते रह गई हो कोई बात

दूसरे पैग के बाद खरगोश ने कहा
मुझे नहीं मालूम कि तनहा क्यों हूँ.

ये भी नहीं पता कि किसी को चाहने से
कोई किस तरह हो जाता है तनहा
जबकि वह रहा ना हो कभी भी उसके साथ.
* * *

खरगोश ने एक तरफ रख दिया,
आधी पढ़ी,
रिलेशनशिप की किताब को
कि हर कोई दूसरे को ठहरा रहा था दोषी.

जिन्होंने नहीं लगाये थे दोष
वे अभी थे प्रेम में
और उनके पहलू में रखा था, इंतजार.
* * *

उसकी आमद का ख़याल

शाम और रात के बीच एक छोटा सा समय आता है। उस समय एक अविश्वसनीय चुप्पी होती है। मुझे कई बार लगता है कि मालखाने के दो पहरेदार अपनी ड्यूटी क...