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कभी सोचा है तुमने?


पिछले कई दिनों से कहानियों के ड्राफ्ट्स को मुकम्मल करने के काम में लगा हूँ। छब्बीस हज़ार शब्दों वाली कुल छः कहानियाँ मेल के जरिये दोस्त को भेज दी थी। कल तक तीन और ड्राफ्ट को पूरा कर लिया। बारह हज़ार शब्द और हो गए, सोचा चलो पूरा हुआ पहली किताब का काम। विंडोज़ सेवन प्लेटफार्म पर एमएस वर्ड में काम कर रहा था। जैसे ही वर्ड को बंद किया तो उसने पूछा आपके क्लिपबोर्ड पर कुछ बहुत ज्यादा इकट्ठा हो गया है। क्या इसे फिर भी सेव किया जाए। मैं कहानियों को कंट्रोल एस करके निश्चिंत था इलिए कहा जाने दो। वर्ड ने मेरा कहना माना और सब किए धरे को वापस असली शक्ल में पहुंचा दिया। 

एक बार जी उदास हो गया। फिर सोचा कि चलो अच्छा हुआ। ये कहानियाँ कौनसी बेस्ट सेलर होनी है। अपना ही लिखा है और मिट जाने से अपन ही उदास हैं। आओ सुकून का काम करते हैं, कुछ बेवजह की बातें करते हैं 


मास्टर के हाथ में डंडा 

यूं तो बड़ी चालाकी से किया था शामिल
उसने बदनीयती को दुनिया में
मगर अब नहीं करता यकीं कोई, खुद उसकी नीयत पर ।

कभी कभी फूटी किस्मत ईश्वर को भी ले डूबती है।
* * *

शाम और रात के बीच का कोई वक़्त 

और भी उबलेगी भट्टी कच्ची शराब की
और भी भुने हुये चनों की खुशबू फैलेगी
कि दुनिया और खिलेगी खूबसूरत होकर।

मगर इस दुनिया से जो चीज़ खो जाएगी, वो मैं हूँ।
* * *

आवाज़ का सत्यापन 

विज्ञान के विद्यार्थी ने कहा 
आवाज़ एक भौतिक चीज़ है
और पिए हुए खरगोश ने उसका मुंह चूम लिया।
* * *
आवाज़ का परिणाम 

उसकी आवाज़ को पहली बार छू लो तो
किसी सूरत न समझ पाओ कुछ
हैरत की उलझनों में होश नाकाम हो जाये.

कि दिल जो चाहे उसे हालात कब चाहा करते हैं
* * *
[Image courtesy : Johnass]

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