ख़ूबसूरत औरतें


प्रेम तो था मगर अलभ्य सा, ख़ुशी थी मगर नाकाफ़ी थी। अशांत, अप्रसन्न, टूटे बिखरे जीए जा रहे थे कि किसी ने थाम कर हाथ कहा। मैं भी तुम्हारे साथ चलूँ? ख़्वाब ख़ूबसूरत भी होते हैं। बेवजह की बहुत सारी बातें... उसके बारे में नहीं मगर ख़ूबसूरत औरतों के बारे में

कुछ मूर्ख लोग बातें करते हैं
ख़ूबसूरत औरतों के बारे में
कि वे छूते ही बदल जाती हैं प्रेतों में
और छूने वाला हो जाता है
पनीर के पीछे भागता, बिना पूंछ वाला चूहा।
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शक्की आदमी को
हर बार यही संदेह होता है
कि ख़ूबसूरत औरतें घिरी होती हैं संदेहों से।
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यही एक मुश्किल है
कि अँधेरे में डर जाती हैं ख़ूबसूरत औरतें
कि अँधेरा ढक देता है ख़ूबसूरती को।
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हर समय एक नुकीली चीज़
चुभती रहती है ऐसी औरतों को
कि वे ख़ूबसूरत औरतें हैं।
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सुन्दरता की सारी प्रस्तावनाएँ
हो जाती हैं व्यर्थ, ख़ूबसूरत औरतों के बारे में
जब कोई पढ़ रहा होता है
उपसंहार से ठीक पहले की कुछ पंक्तियाँ।
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ख़ूबसूरत औरतें
सुंदर ततैये का घोंसला होती है
उसके अन्दर से खिल कर उड़ती रहती है
हज़ार ख़ूबसूरत औरतें।
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प्रेम करने वाली
ख़ूबसूरत औरतें खतरनाक होती है
जब वे कहती हैं कि प्रेम किया,
उसी वक़्त मुकम्मल हो जाता है उनका प्रेम। 

वे कम ही मौकों पर
इंतज़ार करती ऐसे ही किसी वाक्य का अपने महबूब से।
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तुम यकीन कर सकते हो
इस बात का कि रात के वक़्त ख़ूबसूरत औरत
कोई तारा नहीं बन जाती है.
वह वहीं होती है बिस्तर के दायें या बाएं
जैसे मैं अपनी पत्नी को पाता हूँ।

हालाँकि लगभग सब ख़ूबसूरत औरतें
सुबह गायब होकर
कर रही होती हैं, रसोई की चीज़ों से प्रेम।
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ख़ूबसूरत औरतें नहीं करती हैं
बदसूरत औरतों की बातें
वे उनके गले लग कर रोती हैं। 

दुःख एक से होते हैं, अलग अलग रंग रूप की औरतों के।
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कुछ  ख़ूबसूरत  औरतें
दुकानों के चक्कर काटती रहती हैं
कि वे ले रही होती हैं बदला 
कि आदमी भी उनको
किसी चीज़ की ही तरह देखता है हर वक़्त।
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लोगों ने बेवजह और बहुत सारा सोचा है
ख़ूबसूरत औरतों के बारे में
मगर उन्होंने कभी सुना नहीं गौर से
कि खूबसूरत औरतें लोक गीत का आगाज़ है
और आगे के सारे मिसरे उनके खूबसूरत दुःख।
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षड़यंत्र होती हैं
ख़ूबसूरत औरतें, अपने ही खिलाफ़।
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हर जगह होती हैं, ख़ूबसूरत औरतें
सबसे अधिक, रसोई घर के अन्दर। 
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[Painting Image Courtesy : First sketch : Anjali Mitra Grover]

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