भूल जाओ

कोई इतना पास से गुज़र जाए और देख न सकें उसकी सूरत तो दिल उदास हो जाता है। धूप के तलबगार छोटे छोटे दिन आने को हैं ताकि याद की लंबी रातों में की जा सके अतीत की लंबी जुगाली। और बहुत सारी बेवजह की बातें। 

भूल जाओ
पगडंडी के पत्थर से लगी चोट थी
वो बबूल का एक नुकीला कांटा था।

ये भी भूल जाओ कि तुमने ये बात पढ़ी।
* * *

ये रंग
तुम्हारी अंगुलियों की
खुशबू बारे में कुछ नहीं कहता। 

ज़रा पास आओ। 
* * *

इसलिए मेरी जिज्ञासा का रंग सलेटी है
कि देखूँ  
तुम्हें छूकर ढल जाए जाने किस रंग में। 
* * *

विवेक से भरे दुख
और ईश्वर के बीच की दूरी बहुत कम होती है

इसलिए तुम कहीं मत जाओ। 
* * *

इस पर भी अगर आप
दो कदम और चल सकें तो 
मिट सकता है भरम 
कि ईश्वर कोई चीज़ नहीं होती, दुख भी कुछ नहीं होता।
* * *

मेरी नास्तिकता पर 
तुम्हें दया आ सकती है
हो सकता है कि तुम मेरा सिर भी फोड़ दो।

मैं अगर तुमसे प्यार करता हूँ, तो इसके सिवा कुछ नहीं कर सकता।
* * *

कोई समझ नहीं सकता किसी का दुख
आस पास के लोग सिर्फ हिला सकते हैं गरदन
दूर बैठे हुये लोग भेज सकते हैं अफसोस से भर संदेशे
प्रेमी रो सकता है, उस दुख से भी अधिक गहरा।

मगर ठीक ठीक नहीं समझ सकता कोई भी।
* * *

मैं इस वक़्त 
अपने भाई के घर में आँगन पर लेटा हूँ
देखता हूँ अपनी बेटी को टीवी पर कोई फ़िल्म देखते हुये
और दिन के तीन बज गए हैं।

बड़े दिनों के बाद
किसी याद से बाहर आया सिर्फ इतना सा ख़याल। 
* * *

प्रेम में एक तस्वीर 
जब ठीक ठीक नहीं बनती आँखों में 
तब अपने बेटे की गुदगुदी से 
खिलखिलाती हुई, औरत याद आती है।
***

मुझे माफ कर दो
इससे सरल रास्ता नहीं था तुम्हारे साथ होने का
इसलिए तुमसे प्रेम कर बैठा।
***

आओ उसको याद करें
कि आंसुओं से भीग सकें दिल के बंजर खेत।
***

हाँ मैं क्यूबा का नागरिक हूँ
मगर राजस्थान के रेगिस्तान में पैदा हुआ हूँ।

हिटलर के लिए भी मनाही नहीं थी, गुजरात में जन्म लेने की।
***

[Image courtesy : Alok Tewari]

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