November 5, 2011

मर्तबान की तलछट में उदासी



प्रेम निर्वृति नहीं है. इसका उद्यापन असंभव है.

एक मांझा सीढ़ियों के किनारे पर अटक गया है. भौतिकी पढ़े बिना किसी बच्चे ने मांझे के तनाव में तरंगों का संसार रच कर अपनी चरखी के लिए अधिकतम हिस्सा बचा लिया होगा. मैंने सोचा कि मेरे पास भी एक साबुत डोर कहां बची है. मुझे ये हुनर क्यों नहीं आया. मेरा धागा तो उलझा ही रहा और चरखी टीन-ऐज़ को अलविदा कहने के दिनों में कहीं खो गयी.

साल डूबते गए और ख़ुशी सकेरने की कोशिश में ज़िन्दगी की डोर का सिरा कितनी ही बार ज़ख़्मी होकर टूटता गया. हम प्रेम कि तलाश में जिस निर्मल और साबुत मन को लेकर निकले थे. वह कितनी ही बार बिखर चुका है और उसका तलछट गंदली स्मृतियों से भर गया है. इस पारदर्शी मर्तबान में रखी आशाएं विनष्ट हो चुकी हैं.

इसी असंभव से नफ़रत करते हुए एक बेवजह की बात.

उन दिनों स्पाई कैम नहीं थे
और जेब खर्च से नहीं खरीदा जा सकता था
एक सीसीडी कैमरा.

इसलिए उसने
खिड़की में बैठे हुए,
फर्श पर लेटे हुए,
बस के सफ़र की नीम नींद में
मेरे होठों पर रखे, नर्म ताजा बोसे.

मेरे सीने पर लिखा
अपने आंसुओं की स्याही से
और आँखों की अचरज भरी रौशनी से बुनी
सम्मोहक विवस्त्र फ़िल्म.

बाद बरसों के अब तक
याद के आलों में रखे 
इसी सामान से होता हूँ, ब्लैक मेल.

आज जाने किसलिए ये बात कही है
यूं तो बातें बेवजह हैं और बहुत सी हैं.
* * *

प्रेम के कवच का रहस्यमयी बीजक आंसू भरी आँखों से ही पढ़ा जा सकता है.
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.