January 1, 2012

एक तुम्हारे नाम का अक्षर


नए साल के लिए मैं कुछ शुभकामनाएं चुन लेता मगर जॉन लेनोन, वूडी एलेन, मार्क ट्वेन चुप थे, मजाज़, फैज़, ग़ालिब और मीर सब चुप थे इसलिए एक बेवजह की बात लिख कर ये दुआ करता हूँ कि इस दोशीज़ा साल से तुम्हारा इश्क़ कायम रहे.

एक तुम्हारे नाम का अक्षर

खिड़की के पार बर्फ के रेशे थे, ख्वाहिशों के उड़ते फाहे थे
मगर नाच की आखिरी लरज़िश के बाद
डाल पर झूलती चिड़िया ने गाये एक गीत के कुछ मिसरे.

अँगुलियों से फिसल कर अब, रजाई की ठंडी तह पर गिरा है मोबाइल
कि तुम्हारे नाम के पहले अक्षर से आगे लिखा नहीं गया कुछ भी.

दीवारों पर यादों का सफ़ीना है, लिहाफों में उदासी है
कह तो दूँ सब तुमको मगर बातें बेवजह हैं और बहुत सी हैं.

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.