January 6, 2012

रेवड़ी के ठेले


बेवजह की बातें जो इस ब्लॉग की किसी पोस्ट में शामिल नहीं है.

सलाह

मित्र, मैं कल सुबह से बड़ा उदास हूँ
बावजूद इसके तुम्हें इक नेक सलाह देना चाहता हूँ कि
डूबते उजालों को देख उसकी याद में संजीदा न होना.

सोचना उन दिनों को जब गालों को गरम हवा चूमती थी ...
शाम के बुझने से पहले छत का मौसम जेबों में भर आता था
और हाथों के तकिये पर सर रख कर सो जाते थे.

काश मुहब्बत लोकगीतों सी अनगढ़ न होकर
घरानों के बड़े ख़याल की बंदिशें होती जिसे नियम से सीखा जा सकता.
* * *

ख़त जो लिखा नहीं

मैंने तुम्हें एक ख़त लिखा है.
उसमें मजाज़ की इक नज़्म लिखी
और पास रह कर दूर हो जाने का हुनर लिखा है.

एक आईने का बयान है उसमें
कि टीन ऐज़ के मुहासे के धब्बे जैसी तेरी याद
हमेशा मेरे साथ रहती है. 
फिर कई सालों का फासला लिखा
और ये भी लिखा है कि बहुत चुभती है चुप्पियाँ.

यकीनन, तुम पढोगे उसे मुहब्बत की रौशनी में
और सो नहीं पाओगे किसी भी करवट .
इसे पढ़ कर रो दोगे तुम, यही सोच कर रो पड़ी हूँ मैं.
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.