February 25, 2012

ये कोई नहीं जानता...


स्टूडियो के कालीन पर जाने कितनी बार दोस्तों के साथ अधलेटे हुए कुछ गीतों के मिसरे सुने, कभी साज़ छेड़ते हुए किसी ने कोई ग़ज़ल गुनगुनाई और मैं उनको अपनी बेवजह की बातें और दम झूठी कहानियों के प्लाट सुनाता रहा. इस तरह दफ़्तर की ज़िंदगी के दिन और रात बुझते गए. कल मगर साँझ के साथ ठंडक लौट आई. रात में अजब तन्हाई थी. स्टूडियो के कालीन पर लेटे हुए लगता था किसी से बातें किये जा रहा हूँ. मुझे अक्सर मालूम नहीं होता कि किसकी कमी को अपने आस पास पाता हूँ. किसलिए एक तवील ख़ामोशी गढता हूँ. मैं किसलिए शहरों में एक सूनी पड़ी बैंच और वीरानों में दरख़्त का घना साया सोचता हूँ.

सब बेसलीका सब बेसबब ... जैसी कि ये कुछ बेवजह की बातें हैं. एक चश्मे वाली लड़की को याद करते हुए लिखी थी. वो लड़की जो मुझे मेट्रो में मिला करती थी. हालाँकि मैं बड़े शहरों को गया नहीं और रेगिस्तान में मेट्रो की जरुरत नहीं. फिर आज सुबह के ख्वाबों में मैंने एक पारदर्शी फ्रेम वाला चश्मा लगा रखा था. मैं घबराया कि सोते हुए ये कहीं टूट न गया हो. सब उलझन है, इसलिए अकेलेपन का शोर है और सघन उदासी. ज़िंदगी उतनी वाहियात भी नहीं है जितनी कि मैं सोचता हूँ मगर क्या करूँ ऐसी बातें लिखने में ही सुकून आता है.

उसने चश्मे की ओट से
दस्तक देने वाले से पूछा
कि कौन हो तुम?

ज़िन्दगी फिर दगाबाज़ निकली.
वहां कोई नहीं था
* * *

उसने दिव्य दृष्टि से खोला
ज़िन्दगी का आखिरी पन्ना.
और पढ़ कर चौंक उठी.

कि वह ताउम्र अकेली थी.
* * *

एक नन्हे बच्चे ने अपनी कॉपी में
लकीरों से बनाये कई उलझे हुए रास्ते
फिर सो गया आँगन के बीच में.

आधी नींद में नाचती रही उसकी पुतलियाँ
वह मुस्कुराया कई बार
और अचानक उदासी के एक वर्तुल ने काटा
उसके चेहरे पर चक्कर.

आखिर वह कच्ची नींद से उठ बैठा.

उसे नीम नींद में कोई कर गया होगा तन्हा
मुझे लगा, छूट रहा है तुम्हारा हाथ मेरे हाथ से.

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.