April 11, 2012

खरगोश भी पी सकता है, शराब...


एक काम की बात, एक पेड़ जैसे आदमी की कामना, साथ ही जादूगर लड़की और खरगोश की दो बेवजह की बातें.


सब बातें नहीं होनी चाहिए हमारे बस में
मगर मूर्खतापूर्वक करना प्रेम
और समझदारी से मारे जाना, सीखना चाहिए सबको.
* * *

हमें पेड़ की तरह
अपने पांवों में उगानी चाहिए
कुछ मजबूत जड़ें
और शाखाओं को देना चाहिए, सही आकार
कि उन पर पंछी बना सकें घोंसले.

पत्तियों को देना चाहिए हुनर
कि वे ख़ुद के लिए जुटा सकें धूप
और राहगीरों के विश्राम को छाया.

जब भी सूखा पड़े, जड़ें सींच लाये पानी
पंछी बता सकें कि आने को है तूफ़ान
और राहगीर फिर से बो दें, हमारे बीज.

इस तरह ख़ुद को करना चाहिए तैयार
दुर्भाग्य का मुकाबला करने के लिए.
* * *

लड़की ने एक जादूगर की तरह
दिल से निकाल कर बैंच पर रख दिया
एक ज़िन्दा खरगोश
और फिर नए करतबों में लग गई.

कि क्या नहीं होता इस दुनिया में
मगर अब भी लोग देखते हैं हैरत से
कि बैंच पर बैठा खरगोश, पीने लगा, शराब. 
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.