May 26, 2012

और कुछ मौत के बाद...


बेवजह की बातें लिखना, मुहब्बत करने जैसा काम है कि हो गई है, अब क्या किया जा सकता है. पोस्ट का एंट्रो लिखना घर बसाने सरीखा मुश्किल काम...

एक दिन आदमी ने उकता कर
नफ़रत जैसी चीज़ को उछाल दिया
आसमान की ओर मगर वह लौट आई.

वह ख़ुद उछल गया
तो गिर पड़ा वहीं, जहाँ से उछला था.

फिर उस आदमी ने
कर दिया मुआफ़ उन लोगों को
जो हज़ार नफ़रतों से घिरे हुए भी जी रहे थे.
* * *

कुछ लोग ज़िन्दगी को चुनते हैं
और कसते जाते हैं चप्पू वाले लूप के हुक
नदी में उतरने से पहले.

कुछ लोग तोड़ डालते हैं अपनी नाव
और किनारे बैठ कर खेलते रहते हैं
सूरज को उगाने और डुबाने का खेल.

आखिर दोनों तरह के लोग मर जाते हैं.
* * *

एक दिन सब उबर आते हैं
तथ्यों और परिणामों के जंजाल से

कुछ मौत से पहले और कुछ मौत के बाद.
* * *
[Painting Image courtesy : Anna Bocek]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.