June 2, 2012

अगर आप कभी देख सकें


आह ! बीस दिन पुरानी लू. दर्द से भरा बदन और हरारत. कुछ बातें, बेवजह की बातें...

नाकामी से दुखी होकर
ज़िन्दगी देखती है, नयी ज़मीन
और सोचती है कोई नया रास्ता
जहाँ से आगे शुरू किया जा सके, सफ़र.

नाकामी को नहीं दिया जा सकता तलाक
कि नाकामी से हुआ नहीं था कभी निक़ाह .
* * *

लकड़ी के पलंग पड़े रहते हैं वहीं
जहाँ उनको रख दिया जाता है
जैसे ठहरे हुए इंतजार में, कोई महबूब.

बैंक के लोकर में रखी होती हैं कुछ चीज़ें
जैसे वीरान जगहों पर
किसी के साथ बितायी हुई शामों की याद.

अगर आप कभी देख सकें मुड़ कर, ख़ुद को
तो यही तस्वीर पाएंगे
कि आपने बीते लम्हों को कर लिया हैं पलंग
और समाये हुए हैं, उसकी गोद में.
देख रहे हैं, उन्हीं लम्हों का ख़्वाब
जो रखे हैं याद के खाते में सावधि जमा की तरह.
* * *

[Painting Image courtesy : Lynne Taetzsch ]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.