June 26, 2012

कुछ इस तरह...


जब मैं नहीं कर रहा होता हूँ बेवजह की बातें तब ख़ुद को ख़ुद से बहुत दूर पाता हूँ. हालाँकि ये बातें कोई असर नहीं जगाती मगर मुझे सुकून हो इसी तरह तो फिर...

नियति

मुझे, इस खेल में होना था
ईश्वर के दूत की पत्नी
तनहा और बिना किसी रोमांच के.
* * *

तुम्हारे बिना 

समय से पहले
सत्य को पा चुके आदमी की
पीठ से उतरती बारीक धूल की तरह.

स्मृतियों से घिरी
तनहा जी रही नायिका के
सूखे आंसू में चमकती बेदिली की तरह.

तुम्हारे बिना, कुछ इस तरह. 
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.