August 24, 2012

हम दोनों चले जायेंगे उत्तरी ध्रुव


किसी प्रेतात्मा को छूकर आई ख़राब हवा थी। किसी आकाशीय जादुई जीव की परछाई पड़ गयी थी, शराब पर। किसी मेहराब पर उलटे लटके हुए रक्तपिपासु की पुकार में बसी थी अपने महबूब की याद। दुनिया का एक कोना था और बहुत सारी तन्हाई थी। मेरे मन में एक ख़याल था कि एक दिन दबा दूँगा, तुम्हारा गला। ऐसे ख़राब हालात में बेवजह की बातें भी ख़राब थी...

मेरा मन एक अजगर
अपनी ही कुंडली में हैरान।

तेरी याद
ताबीज में बंधा भालू का नाखून।
* * *

वो दिन ही ख़राब था
एक ऐसी याद का दिन
जिस पर लिखी हो, क़ैद की उदासी।
* * *

मुझे जंगली खरगोशों से प्यार है
कि उनको जब नहीं होना होता है बाँहों में
वे सभ्य होने की जगह
मचलते रहते हैं, भाग जाने को।

जंगली खरगोश तुम्हारे जैसे हैं।
* * *

और मैं मरा ही नहीं
जीता गया, निरंतर।
* * *

मैंने एक आधारशिला रखी
कि अबकी बरसात में
यहाँ से बहाई जाएगी नदी।

नादाँ लोग हंस कर चले गए, जैसे वे हँसते हैं प्यार पर।
* * *

वहाँ लोग कम और अच्छे हैं,
इसलिए सोचा है मैंने
कि हम दोनों चले जायेंगे उत्तरी ध्रुव।

यहाँ प्रेम करने और कुछ दिन बाद
हमारी नंगी लाशों के
गालियों में पड़े मिलने से बर्फीली तन्हाई बेहतर होगी।
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.