September 15, 2012

आमद के इंतज़ार में


भाई ने खाना खाते वक़्त अनजाने या जानबूझ कर रोटी का एक टुकड़ा कच्चे आँगन पर गिरा दिया. चींटियों की कतार ने उसे घेर लिया चारों तरफ से और मैं बहुत देर तक ख़ुशी से देखता रहा कि आदमी अभी तक भूला नहीं है, प्रेम करना. खेत के बीच चलते हुए मेरे पैर की अँगुलियों को छू जाती हरी घास की कोंपलें. वे गुदगुदी करती जैसे कह रही हों कि किसके ख़याल में खोये रहते हो. 

नीले कैनवास पर छितराए हुए सफ़ेद बादलों के नीचे चलते हुए, मेरे चहरे पर छाने लगी हरे रंग की रंगत. मुझे याद आया फसल काटती हुई गाँव की औरत का कोई लोकगीत. एक कच्ची हरी बाली शरमा कर झुक गयी मुझसे ज़रा दूर जब भी उस गीत में आया शैतान की प्रेमिका का ज़िक्र... मैंने कहा शरमाओ नहीं, सुनों बेवजह की बातें. 

पितामह ने खेतों में अन्न उगाया
पिताजी ने बोई अक्षरों की फसलें.
शैतान पड़ा रहा प्रेमिका के प्यार में.
* * *
आदमी ने बनाये ऐसे तालाब
जिनमें टर्राते रहें याद के मेंढक
शैतान सुनता रहा उनका गीत.
प्रेमिका की याद के दरख़्त की सबसे ऊँची शाख पर बैठा हुआ.
* * *
अगर उसे मालूम होता
या उसे मालूम हो जाये
या कभी न हो सके उसे मालूम
उसको कोई फर्क नहीं पड़ता.
बस शैतान खोया रहता है, उसकी याद में
* * *
हवा में लहराती हरे रंग की एक बड़ी पत्ती से
प्रेम करने में मशगूल था, हरे रंग का टिड्डा
पीले सिट्टे की आमद के इंतज़ार में थी पीले रंग की चिड़िया
शैतान ने सोचा आज उसने पहना होगा, कौनसा रंग.
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.