September 3, 2014

अंतर्मुखी उड़ान की विध

अचानक बरसात होने लगी. सराय रोहिल्ला की तंग गलियों में भरे पूरे इंतज़ार का अभ्यस्त टेक्सी वाला अपने गमछे से अंदर की तरफ का शीशा पोंछता हुआ पड़ोस में खड़े ऑटो वाले को कहता है, निकल जायेगी. देवता उसके इस ज्ञान से खुश होकर और तेज पानी बरसाने लगते हैं. टेक्सी नहीं निकलेगी, इसलिए वह चुप खड़ा रहता है.


मकोड़ा देखता है आसमान की ओर
ऊपर मगर छत की सफेदी पसरी है.

वह खुजाता है अपना सर
आदमकद भार से भरे
भारी कदम उसके पास से गुज़रते हैं.

लाल  रंग की मोल्डेड कुर्सी पर बैठा
आदमी सोचता है
मकोड़ा इस पल है और शायद अगले पल नहीं.

या शायद आदमी सोचता है
मकोड़े के बहाने अपने ही बारे में.

मकोड़ा फिर से खुजाता है सर
बढ़ जाता है भारी कदमों के बीच से बेपरवाह.
* * *

लोहे की सलाखों के सहारे से खड़ी है सायकिल
लोहा खड़ा है, लोहे का सहारा लिए हुए.

यूं तो उर्ध्वाकार खड़ी रह सकती है सायकिल
बिना किसी सहारे अपनी ही किसी सीधी बैठक के बल
या अपनी किसी टेढ़ी टांग के सहारे किसी तोप की तरह झुकी हुई
या अपने सबसे बुरे दिनों में हो पड़ी हों चित्त मिटटी से सनी.

लोहे का दरवाज़ा भी खड़ा कब तक रहेगा?
* * *

पेड़ की छाया में धोबी धोता है
अतीत के स्याह धब्बे.

एक कुत्ता चाहता है चाटना
गले का गोल ज़ख्म.

एक पीला पत्ता उड़ा जाता है
अपनी अंतर्मुखी उड़ान की विध.

हर किसी को मुक्ति है
दुःख सिर्फ प्रतीक्षा.
* * *


सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.