February 5, 2017

मेरी ज़िन्दगी से रश्क न करना



अब नहीं घबराता है दिल
दोपहर की नींद से जागते ही.

कोई इतनी तकलीफ देगा, कभी सोचा न था.
* * *


एक के बाद एक
उठकर चल देते हैं
विरह, प्रतीक्षा और संताप.

एक ख़ूबसूरत रंग से
भर उठती है तन्हाई.

और फिर, कुर्सी पर अधलेटे यूं तारों को देखना.

[तुम मेरी ज़िन्दगी से रश्क न करना, इसे ऐसा बनाने को ख़ुद को सताना बहुत पड़ता है.]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.