March 23, 2017

ठीक समय की प्रतीक्षा

मन

इस तरह गया घर में
जैसे सर्द दिनों की
संकुचाती धूप उतरती है।

मगर बदन रात भर
औंधा पड़ा रहा, बेख़याल।

देखो, एक ही ज़िन्दगी की
दो चीज़ें कितनी अलग हैं।
• * *

कई बार हम अपनी ही ज़िन्दगी को संवारने से उदासीन किसी ठीक समय की प्रतीक्षा करते हैं। निरन्तर उकताहट आती है कि ऐसा क्यों है कि ज़िन्दगी में सबकुछ ठीक करने को ही रखा है।

कोई एक बात तो ऐसी होनी चाहिए, जो बिलकुल ठीक हो।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.