March 31, 2017

कारवां गुज़र गया


रख दो रात के कंधे पर हाथ
तनहा-तनहा थक गयी होगी।
• * *

किसलिए आते है दिन
रात बनी है किसलिए।

काश
एक तुम न हो तो सवाल भी न रहें।
• * *

तुम जो छू भी लो
किसी को किसी भी तरह।

कंधा जिसे चूमा न था
वही काम बाकी रहेगा।
• * *

कारवां
गुज़र गया है आज का
जाने कब तक के लिए

* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.