June 12, 2017

वही बरसों का वीराना.

मेरे पहलू में आकर के 
अभी से तुम क्या बैठोगे।
अभी तुमको कितने ही काम बाकी है
शादी है, मिन्नतें हैं, तल्खी है उदासी है।
* * *

वही इक रात का सौदा
वही बरसों का वीराना.

जो आ जाओ तो क्या है, ना ओओगे तो क्या होगा. 
* * *

अंगुलियां एक अक्षर लिखती है
और दिल दो-दो बार धड़कता है।
यही इक बात है जिस पर, अभी तक प्यार आता है।
* * *

सोचते थे कि
बड़ी कीमती शै है ज़िन्दगी।
मगर क्या पता था
कि कुछ पी लेंगे, किसी को चूम लेंगे 
और यही करते हुए मर जाएंगे।
* * *
अब तक बना लिया होता दूसरा पेग
और बालकनी धुएं से भर गई होती।
अब तक
इनबॉक्स में ये लिखकर मिटा भी दिया होता 
कि तुम्हारी याद आती है।
तुम गए तो ज़िन्दगी चलती रही मगर
एक व्हिस्की न हो तो सब काम ठहर जाते हैं।
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.