January 24, 2019

अपने साथ



सात बरस में चेहरा कितना बदल जाता है। मेरे चेहरे पर प्रौढ़ता झलकने लगी। उसके चेहरे से कमसिन भराव जाता रहा।

कच्चेपन से भरी सुंदरता की जगह इस बार वो एक ख़ूबसूरत स्त्री का चेहरा था। मैंने कहा- "तुम बड़ी हो गयी"

मैं ऐसे जब भी कहता, वह अपना निचला होंठ दाँतों में दबाकर मुस्कुराती थी। इस बार उसने ऐसा नहीं किया। बस आँख भर देखा। "ये आपका थैला कितना सुंदर है न?"

मैंने कहा- "तुम ले जाओ"

"पहले से ही कितना कुछ तो रखा है। बुक फेयर के पास, लाइटर, पेन और वे पन्ने जिनपर कुछ न कुछ हर बार लिखवाया" थोड़ा रुककर कहा- "बातें बेवजह फिर से कब तक छप कर आएगी।"

"तुम एडिट करोगी?"

उसने सर हिलाया। जैसे कोई छोटा बच्चा हामी भरता है। मैने कहा- "चलो एडिटर, कॉफ़ी पीते हैं"

फुटपाथ जैसा कुछ बनाने के लिए बनी ईंटों की लकीर पर बैठे थे। कुछ एक बेतरतीब पेड़ खड़े थे। एक नीले रंग का डस्टबिन रखा था। लोग कॉफ़ी लेने के लिए कतार में खड़े थे।

उसने अपने थैले से एक किताब निकाली। मुझे देते हुए कहा- "इस पर मेरे लिए कुछ लिख दो"

मैंने बहुत अचरज से देखा। "ये मेरी लिखी किताब नहीं है, न मैंने इसे तुम्हारे लिए खरीदा है।"

"लिख दो"

मैंने किताब के भीतर आख़िरी पन्ने पर लिख दिया "जिसके साथ अतीत और भविष्य से मुक्त महसूस करो, उसके साथ होना।"

मेरी लिखी पंक्तियां पढ़कर उसने पूछा- "ऐसा कोई होता है। आप किसके साथ ऐसा फ़ील करते हैं?"

"अपने साथ" 

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.