May 8, 2019

अकेले कब तक बैठे रहोगे

रेत ने हवा से कहा
आओ कुछ रोज़ के लिए
किसी के घर चलें।

यूं बियाबां मैं बैठे-बैठे ऊब होने लगी।
* * *


नीमपागल आदमी का ख़्वाब
उसकी गर्दन पर फिसलता बार-बार।

भरी भरी पीठ पर पड़े
कॉटन के कुर्ते पर सजे फूलों से कहता।

तुम भी अकेले कब तक बैठे रहोगे?
* * *

इच्छा ज़हर है
पूरी होते ही, आप मर जाती है।
* * *

इसके आगे भी बहुत कुछ लिखा। उसे यहाँ नहीं लिख रहा हूँ। अब मुझे अजीब लगता है, असल चाहना का लिखना।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.