October 21, 2019

जब तुमने पढ़ लिया, मैंने उसे मिटा दिया।

मेरी चाहना का हासिल वे नोट्स तो होने ही चाहिए थे, जो तुम्हारे कभी न आने वाले जवाब के बारे होते। मेरी बेचैनी के बारे में होते। उन शामों और रातों के बारे में होते जब ऐसा लग रहा होता कि मैं तुम्हारे ख़याल से भरा कोई लम्हा जी रहा हूँ।
* * *


प्यार करने पर क्या मिलता है?

एक लम्बी प्रतीक्षा जो सही जा सके। एक बार देख लेने का एफर्ट जो कभी न लिया जा सके। मगर जो हो पाता है वह ये है कि एक डर मिलता है।

इस बात का डर कि इसका अंजाम भी वही होगा।

रेगिस्तानी क़स्बे की एक सड़क के पास गुलमोहर खड़ा था। उसे देखते हुए सोचा कि मैंने तुमको चाह कर ग़लत तो कुछ न किया। गुलमोहर को रेगिस्तान चाह सकता है तो मैं भी तुम्हें चाहने के लिए माफ़ कर दिया जाऊं। शायद।
* * *

उदासी एक बर्फीला रेगिस्तान थी
समय रेल के डिब्बों की तरह गुज़रता था
चेरी ब्लॉसम भी किसी चीज़ का नाम भर था।

जब तक
नहीं देखा था तुम्हें मुस्कुराते हुए
सीधी लटों में नहीं खो गया मेरा दिल
तुम्हारी हंसी ने चुरा न लिया मुझे।

इसके बाद ये चेरी ब्लॉसम स्माइली
मेरी अंगुलियों पर चढ़ गयी
जैसे एक मौसम दिल तक उतर आता है।

और
मैं जानता हूँ, दिल कितना लालची है।
🌸🌸

पंडित ने कहा
राहू ने ऐसा घर कर रखा है
कि जेल जाओगे तुम।

वह भविष्यपत्र को पढ़ता
समझाता, ज़ोर देता
इस चक्र से बाहर आओ।

हवस का अथाह सागर बन चुके हो।

मगर मैं अपनी चाहना को बचा लाया
कि जो होगा सो होगा, राहू तो उसी घर में है।
* * *

अचानक बाहर जाकर बैठ जाना होता है
कि परिंदों को देख सकें, सुन लें उनकी आवाज़
रास्ते का शोर और आती हुई शाम
भुला दे पिछला लम्हा
कि उस एक लम्हे के बाद कितना कठिन होता है
वहीं होना, जहां तुम हो।

प्रेम में होना साधारण छुअन को
बदल देता है एक अलभ्य बात में।

फिर अचानक लगता है कि मैं क्या हो गया हूँ
एक ऊंघता ऊदबिलाव, एक खोया हुआ परिंदा
एक लहराता चलता हाथी
या कि कोई शहद स्वप्न से भीगा हतप्रभ भालू।

ईश्वर करे कि किसी को प्रेम न हो,
न वह भागता फिरे ख़ुद से।

तुम्हारे पास होने के उस लम्हे के बाद।
* * *

तुम न होते तो चाहना क्या होती
क्या लिखता में किसी के लिए।

न ऐसा इंतज़ार होता
जिसके बारे में किसी को पता भी न हो
कि इंतज़ार करना चाहिए।

मगर
पीछे छूटती रही कविताएं
आगे बढ़ता रहा इंतज़ार।

कभी पता न होना भी अच्छा होता है
कि अगर तुमसे कहना हो तो
क्या कहूंगा मैं
सिवा इसके कि तुम बहुत अच्छे हो।
* * *

मैंने ऐसी पचासों चिट्ठियां मिटा दी हैं कि तुम न थे तो उनको रखकर भी क्या करता।

लेकिन पत्थरों के बीच जंगली फूलों के बीज बचे रह जाते हैं। बारिश के बाद पीले, नारंगी, गुलाबी फूलों से ढक जाती है पहाड़ की तलहटी। ठीक ऐसे ही आती हुई सर्दियों में मेरा दिल भर जाता है तुम्हारे नाम से।
* * *

जाने क्या बदा है
जाने क्या सोचता हूँ।
* * *

11 January 2019 17.25
Canon EOS 550D
f/1.8 1/640 50.00mm ISO 100

छीजने की आहट

मन एक तमाशा है  जो अपने प्रिय जादूगर का इंतज़ार करता है। शाम से बालकनी में बैठे हुए सुनाई पड़ता है। तुम कितने कोमल हो सकते हो? खुद से पूछने पर...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.