February 14, 2020

झरबेरी सा प्रेम

वेलेंटाइन डे कल आ जायेगा
तुम मुझ तक जाने कब आओगे।
* * *

झरबेरी के बेर था, प्रेम।

दिल इंतज़ार में बना रहता था
जब आ जाते तो इस तरह चुनने लगता
जैसे होठों से तुम्हारे बदन के सितारे चुनता हो।
* * *

कभी कभी बेर चमकते थे
तुम्हारे लज्जा भरे गालों की तरह।

और दिल उन्हें देखता रह जाता था।
* * *

तुम्हें बाहों में भर कर खड़े रहना और
बेरी को झकझोर देना एक सा काम रहा।

टप टप बरसता था प्रेम।
* * *

तुम्हारे होंठ चूम लूँ
ऐसा कहते ही स्याह ज़ुल्फ़ों में
छुप जाती थी तुम्हारी आंखें।

कभी कभी मीठे बेर खोजने को
झांकना पड़ता था झरबेरी के भीतर।
* * *

दुनिया में बहुत मिठास थी
लेकिन मेरी जेबें भरी रहती बेरों से।

होने को तुमसे अधिक
मोहक, सुंदर, कमनीय, मीठा
कोई भी हो सकता था
लेकिन दिल को कोई भाया ही नहीं।
* * *

एक रोज़ हम बाहों में भरे खड़े होंगे
जैसे बेरी के कांटों में फंसी हो अंगुलियां।
* * *

एक तरफ बेर रखे होंगे
एक ओर तुम बैठे होवोगे।

तब लालची दिल क्या करे? ये तुम्ही बताना।
* * *

शाम ढल रही होगी
बेर की मादक गंध हो जाएगी व्हिस्की सी
दिल डूब जाएगा, तुम्हारे बदन की खुशबू में।

जागती आंखों का
इससे सुंदर सपना मैंने अब तक नहीं देखा।
* * *

तस्वीर में कुछ बेर उतने ही लाल हैं, जितनी मेरी हथेलियां थीं, तुम्हें छूने के बाद।

तुम फिर मिलना, बार बार मिलना। तुम्हारा शुक्रिया।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.