February 23, 2020

शैतान की प्रेमिका के अधखुले होंठ

क्या कुछ नहीं कर सकता
स्वर्ग से निष्कासित शैतान।

मगर पैदल गुज़रता है याद से भरा हुआ
देखता है अधखुली खिड़कियां
और सोचता है प्रेमिका के उड़-उड़ आते बालों के बारे में।

राह को देखते
प्रेमी की तरह ठहर जाता है
बिंधा हुआ
कातर, असहाय और अनमना।

भूल जाता है सबकुछ
प्रेम में शैतान।

कभी कभी फैलाता है अपने पंख
और आहिस्ता से समेट लेता है
ऐसा नहीं है कि भूल गया है उड़ना।

किसी मीनार पर
किसी दरख़्त की छांव में
कहीं शोर की लहरों के पास
कभी भरी-भरी तन्हाई में फुसफुसाता है।

बस एक उसकी याद इतनी भारी है
कि सीने पर रखी नाज़ुक कलाई
कि भीगे फाहे को छूती कोई नर्म सांस
कि आंख की कोर पर ठहरी ख़ुशी भरी बून्द।

मुस्कुराता है, उदास होता है
चलता है, लड़खड़ाता है
और कभी उड़ जाता है बहुत दूर शैतान।

प्रेम में शैतान, कितना शैतान बचा रहता है
ये केवल
शैतान की प्रेमिका के अधखुले होंठ जानते हैं।
* * *

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हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.