February 24, 2020

मैं क्यों कांटे बो रहा हूँ

सोई तो क्या ही होगी
शैतान की प्रेमिका।

उनींदा शैतान सोचता है।
* * *

यूँ तो कितनी ही बार
कुछ याद नहीं आता
मगर कभी कभी एक नाम, कर जाता है कितना तन्हा।

ऐसा शैतान ने सोने से पहले सोचा।
* * *

शैतान ने उससे कभी नहीं कहा
कि हम न मिले तो मर जायेंगे।

वह कहता रहा
मेरी जाँ जल्दी मिलो कि मर जाएं।
* * *

शैतान की प्रेमिका
आंखों से हंसती थी।

शैतान भी अजूबा था कि
वह चूमकर प्रेम करता था।
* * *

एक बार शैतान ने सोचा
मैं क्यों कांटे बो रहा हूँ।

लेकिन प्रेम न करने की कोई वजह न थी।
* * *

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.