February 7, 2020

और कितना पड़ा जा सकता है प्रेम में

इससे अधिक
और कितना
पड़ा जा सकता है प्रेम में।

आक के डोडे से उड़े
फूल के पीछे भागते हुए
तुम्हारे ख़याल से टकरा जाऊं।

बाजरे की भूसी में
उछल कर गिर जाऊं बेवजह
और हंसता रहूँ देर तक।

बैठे हुए सूने कुएं की मुंडेर पर
कबूतरों की आवाज़ में
खोजने लगूँ कि तुम कुछ कह रहे हो।

दूर तक
कोई राह नहीं होती जो तुम तक आती हो
मगर बेतरतीब बिखरे
अनार के फूलों में भी दिखाई देता है तुम्हारा चेहरा।

जबकि कुछ नहीं होता
छू नहीं सकते, चूम नहीं सकते
रूह के प्यार की बातें करते,
खुद को बहलाते हुए हर रात खत्म हो जाता हूँ
अपने बिस्तर में तन्हा।

दफ़अतन
तुम्हारे प्रेम में होने के ख़याल से
कभी लगे कि प्रसन्न हूँ, कभी लगे कि उदास हूँ।

इससे अधिक
और कितना
पड़ा जा सकता है प्रेम में।
* * *

तस्वीर आकाशवाणी बाड़मेर के परिसर में उगे जंगली फूल की है। जैसे मैं तुम्हारे जीवन में उग आया।

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Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.