December 19, 2020

यही असल में ख़्वाब है

 हम सट्टा करते थे।

वह धन लाभ के लिए
मैं अपने आनंद के लिए।
कभी-कभी हंसी में
स्त्रियों की बात कर लेते।
कभी संजीदा होकर
पुरानी मोहब्बत की।
था मगर सब सट्टा ही।
* * *
ताश के पत्तों
कैसिनो की गोटियों
शेयर बाज़ार के भावों के साथ
एक अच्छी बात थी।
कि हम उनको ठुकरा देते थे
मगर कोई दोष न लगाता था।
* * *
एक बार और करना है
सुबह-सुबह उसने कहा था।
फिर हम तृप्त हुए और
थकान से भरकर गिर गए।
उससे अच्छा जुआरी
मुझे कोई नहीं मिला।
* * *
अक्सर मेरा दिल
डायस की तरह
एक से दूजे खाने में उछलता रहता था।
चक्कर कहाँ खत्म होगा
ये मैं जानता था मगर मानता न था।
* * *
मैं सट्टे में हारता जाता था
अपने प्रिय लोगों के क़रीब आता जाता था।
इससे अधिक कोई क्या दे सकता है।
* * *
पता नहीं उसने क्या कहा था
जिस पर ब्लाइंड खेल लिया था।
शायद ये
कि तुम्हारी आदत है ऐसी चालें चलना।
मैंने देर रात तक सोचा
प्रेम और सट्टा के बीच कितना कम फर्क है।
* * *
अक्सर सोचता हूँ
कि सट्टे में जो गंवाया, वह कितना था।
अक्सर याद आता है
कुछ भी साथ नहीं चलता।
* * *
सट्टा एक बीमारी है
कि अक्सर लोग हार जाते हैं।
जिस पर परिणाम का असर न हो
उसके लिए गीता का ध्येय वाक्य है।
* * *
हम अगले महीने
फिर सट्टा कर रहे होते।
मगर जुआरियों का
भरोसा क्या है?
* * *
मुझे कोई अफ़सोस नहीं है
सिगरेट, शराब, सट्टा और प्रेम का।
सबसे हमेशा एक उम्मीद रहती है।
* * *
वह जो केवल
हाल पूछकर चुप हो जाता है।
वही मेरा प्रिय जुआरी है
उसी का इंतज़ार है।
* * *
जुआरी और प्रेमी
मरने के बाद भी कोसे जाते हैं।
यही अमरत्व है।
* * *
हम दोनों एक साथ बैठे हैं
इससे सुंदर ख़्वाब मैंने नहीं देखा।
जिसके साथ देखा
उसके साथ कभी नहीं बैठा।
यही असल में ख़्वाब है।
* * *
मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। मैं तुम तक नहीं आऊंगा। मैं तुमको सदा नहीं दूंगा। मैं एक जुआरी हूँ, जो तुम्हारी चाल का इंतज़ार करेगा। तुम आगे होकर चलना।
शुक्रिया।

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