December 5, 2020

हालांकि इसके बाद भी हमने

एक रोज़ उससे उसके पहाड़ और मुझसे मेरा रेगिस्तान छूट गया। उसके उदास झुके कन्धों पर हाथ रखते हुए मैंने कहा कि चलो अच्छा हुआ। अब इससे अधिक बिछड़ना कुछ नहीं हो सकता। * * *

वह जब मेरे पास खड़ी थी
मेरी आँखें हम दोनों को देखकर
मुस्कुरा रही थी।
उसने पूछा क्या हुआ?
मैंने कहा ज़िंदा गोल्डन रेश्यो।
एक पहाड़ की लड़की
और एक रेगिस्तान का लड़का
साथ में परफेक्ट होते हैं।
* * *
फिर हम देर तक टहलते रहे।
मैं सोच रहा था
कि पहाड़ पर कितने तरह के
और कितने सुंदर पेड़ होते हैं।
वह सोच रही थी
रेगिस्तान के सूने वितान पर एक साथ बैठे
दो लोग कितने सुंदर दिखते होंगे।
* * *
मेरे दुख इतने कड़े क्यों है?
मैं उसकी हताशा को
सिर्फ महसूस कर सकता था
मैं उसकी उदासी की
छाया भर देख सकता था।
मैंने सोचा कि कहीं बैठ जाते हैं
कि एक रोज़ उसने कहा था
मैं तुम्हारे घुटनों पर सर रखकर रोना चाहती हूँ।
हालांकि इसके बाद भी हमने
मोहब्बत के बारे में एक दूजे को कुछ न कहा था।
इसलिए
मैं केवल दुआ कर सकता था
कि मेरे सब सुख तुमको मिल जाए।
* * *
एक खाली बेंच देखकर
उसने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया।
इस बरस दुनिया वो नहीं रही।
मैंने कहा अच्छा हुआ
वह दुनिया हमारे मन की थी भी नहीं।
* * *
ऐसी ही बेवजह की बातें
सोचता हुआ मैं सो गया।
असल बात बस इतनी सी थी
कि उसने कल फिर कहा था
इस ज़िन्दगी में, एक बार मुझसे ज़रूर मिलना।
* * *

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हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.