January 19, 2021

यकीन रखो

 इस बात को

तुम नहीं समझोगे।
कि कुछ भी बिला वजह नहीं है।
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जनवरी बीतने को है
मगर बर्फीली हवा चल रही है।
एक तय लकीर के पार भी
कुछ होता होगा।
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अचानक पांव की नस खिंच गई
तो खड़ा होना पड़ा।
सोचा, चलो हिप फ्लास्क ही भर लाते हैं।
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चार मूंगफली के दाने थे
दो गिर गए।
याद आया कि
कोई भी गिर सकता है।
सबकी नियति है।
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सौदा का अर्थ है
दीवानापन
लेन देन का।
फिर भी ये समझना
कि जो है, अच्छा है।
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इतनी धुंध है
कि तारे नहीं दिखते।
मगर सब जानते हैं
वे वहीं है।
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मैं बेहिसाब सम्मोहनों में गिरा मगर मुझे ये कभी भी गिरना नहीं लगा। मैंने चाहा और इंतज़ार किया मगर कभी न लगा कि वक़्त ठहर गया है। मैंने उम्र, दूरी और हालात के बारे में नहीं सोचा। ये कुफ़्र ही है शायद मगर इसका नुकसान कुछ न हुआ केवल एक चुभन भरी याद आ बैठी।
एक रोज़। पक्का। यकीन रखो।
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सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.