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Showing posts from February, 2018

पुलिसवाले की प्रेम कविताएँ

ये बेवजह की बातें भाई और उन दोस्तों के लिए है जो पुलिस की अच्छी लेकिन दबाव वाली ख़राब नौकरी करते हुए मुस्कुराते हुए मिलते हैं.

तुम न संवरती इस तरह
या मैंने फेर ली होती नज़रें.

फौजदारी में न फंसता दिल,
न उम्र भर को होना होता मुजरिम.
* * *

इससे तो अच्छा होता
कि होता बीट कांस्टेबल.

इश्क़ में
गिरफ्तार होने से तो
तेरे दर के फेरे देना अच्छा रहता.
* * *

एक दिल ही था मेरे पास
गश्त गश्त के खेल में चला गया.

अब जमानत को
कागजात में दिखाऊं भी तो क्या?
* * *

जब्ती के लिए
लगी सब अर्जियां नाकाम रही.

मैं मुकरता गया बयान से
कि तुमसे दिल वसूलना
न हो सका मोहब्बत में.
* * *

रोज़ मिलने के वादे से
जब मुकर ही गए हम.

धोखाधड़ी का वाद अटका ही रहा
कभी लगता था तुम आ जाओगी
कभी लगता था मैं ही चला आऊंगा.
* * *

ये कानूनन दोष ही था
नुकसान करके भरपाई न करना.

तुमने दिल तोड़ा बार-बार
और मेरी मोहब्बत इसे अपकृत्य साबित न कर सकी.
* * *

एक रोज़ तुमने कहा
जीयेंगे तेरे साथ मरेंगे तेरे साथ.

अब रहता है दिल उदास कि
यूँ अदमपता हो जाओगे ये उसने सोचा ही नहीं.
* * *

पीटी और ड्रिल बनाती है
सिपाही को मजबूत और अनुशासित…

अच्छा लेखक बनने के बारे में बातें.

पहली बात ये है कि आप चाहते कुछ हैं करते कुछ. आपकी चाहना है कि बड़ी पत्रिकाओं में आपकी तस्वीरें छपें और आपके लेखन के बारे में अच्छी बातें लिखीं हों. समाचार पत्रों के साप्ताहिक परिशिष्ठ हर दो एक महीने में आपके लिए कसीदे पढ़ दें. आपको इकलौता अद्वितीय लेखक बताते रहें. ऐसा आप इसलिए चाहते हैं कि जहाँ जाएँ लोगों की भीड़ आपको घेर लें. उस भीड़ में आपके अपोजिट सेक्स वाले सुन्दर चहरे भी हों और आप उनके दोस्त बन जाएँ. दोस्त कहना तो फिर भी काफी अच्छी बात है. आपकी असल चाहना है कि आप जीवन को भोग सकें. एक से दूजे व्यक्ति को छूते हुए भागते-भागते दुनिया के आख़िरी छोर तक पहुंच जाये.
तो पहली बात ख़ुद से पूछो कि क्या सचमुच लेखक बनना है या लोगों के साथ अन्तरंग होना हो. अगर पहली या दूजी कोई भी बात है तो आपको ये प्रकाशकों-संपादकों की हाजरी में खड़े रहना, आलोचक बनकर किताबों की समीक्षा के नाम पर चाटुकारिता करके अपना समूह बनाना, कोई ई मैगजीन शुरू करना, सम्मान पाने के लिए अवसर तलाशना बंद कर देना चाहिए. आपको यात्रा करनी चाहिए. ऐसी जगहों पर नौकरी करनी चाहिए जहाँ कई दिनों तक ठहरने वाले पर्यटक आते हों. आप कुछ भी बन जाएँ. श…

कुछ का कहना है

कॉमरेड्स ने मुझे ख़राब कॉमरेड कहते हुए मुँह फेर लिया। कांग्रेसी मुझे पसंद नहीं थे और उनको मेरी गरज भी नहीं थी। बीजेपी वालों ने कहा कि आप में बस एक ही कमी रह गयी है कि जेएनयू में नहीं पढ़े।
लेखकों ने कहा तुमको पहले अच्छा प्रेमी बनना चाहिए। प्रेमियों का कहना था कि इससे तो तुम लेखक ठीक हो। आदमियों ने कहा तुम स्त्रियों से घिरे रहते हो। स्त्रियां कहने लगी मैं तुमसे क्यों बात करूँ? तुम्हारे आस-पास और बहुत हैं।
मोटरसाइकिल पर चलता था तो कहा कार क्यों नहीं ले लेते। कार लेने का प्लान किया तो नोटबन्दी हो गयी। नोट खुले तो चेक से पेमेंट अनिवार्य हो गया। चेक के लिए मालूम किया तो याद आया बच्चों की मदद के लिए बची सेविंग के सिवा कुछ बचा नहीं है।
बचपन में लगता था बड़े हो जाएंगे तो आराम आ जायेगा। बड़े हुए तो लग रहा है बच्चों के काम बन जाएं तो आराम आये।
कभी लगता था दिन भर बियर पीने की जगह एक घूंट व्हिस्की अच्छी होगी। कभी लगा रात को भी बीयर पीनी चाहिए। कभी सोचा जिन गर्मियों में ही क्यों सर्द रातों में भी पी जाएं। कभी कपड़े सिलवाये। कहा रेडीमेड सूट नहीं करता स्टिच करवाता हूँ। कभी कहा वो लुक है ही नहीं स्टिच मे…