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प्रेम का कोई तुक नहीं होता

आग के पायदानों पर बैठी स्वर्ण भस्म

देख कर उस हसीं पैकर को...

घर से भागी हुई दुनिया

अलग किस्म की याद जैसे 'साही' की पीठ पर काला सफ़ेद तीर