July 11, 2009

मौज लेण की टेम मतबल आदमी के साथ आदमी फ्री

रे लंगङों थम बैठे हो यहाँ
इब तो मौज लेण की टेम आई है
ल्या रे बाबू मेरे भी ढक्कन भर पूरी तो....
सहायक अभियंता साब टांग चढाये मुर्गे से हो के आराम की मुद्रा में गए पीण आले सब बोतल ने देखते से आण आले टेम में कित्ते बजट की और जरूरत का हिसाब करण लगे जद के भागू ने अपणे कान पर हाथ धर के पता लगाया की कित्ती चढी है मरजाणी घराली ने 'बिना बताये शराब छुड़ाये' वाले हकीम के झांसे में आके सात दिन दवा दे दी
उसकी तो भेन के... आठवें दिन पता चला कि बरसों का खेलाड़ी भागू दो पैग में फ़ैल हो गया, गरीब की गधी लुटगी, इससे तो मर जाणा भला, भागू दो पैग अन्दर ठूंसता तो तीन बाहर गिरते, पानीपत से बड़ी लड़ाई चली कई दिनां के बाद भागू ने अपने जाट दिमाग का काम लिया फेर पता चला के बिना बताये दवाई काम करगी।

कान
धीरे धीरे लाल हो रहे थे मतबल के आज चढ़नी है।

चुस्की
दर चुस्की... साब बड़े मजे ले रया था के आँख चमक पड़ी।

रे
भगवान की लीला न्यारी पण बी से भी "न्याव" न्यारा से भाई आज तो मौज करा दी, के फैसला सुनाया है इब कोई भी किसी की ले सकता है बशर्ते "देणी है के थाणे जाणा है" की नीयत ना राखो मतबल के भाई "तूं राजी है तो भी लूंगा, नहीं है तो भी लूँगा" के मामलों को छोड़ कर कोई करो कहीं करो छूट मिल गई है।

सब
भेन के एक ही साँस में अपणे अपणे गीलास खाली कर गए, भागू की चढ़ने वाली उतरगी, कूद के बोल्या साब मतबल तो बताओ केहता सा अपणी पेंट की जिप ठीक करण लाग्या।

कमीने तो सब और इनमे सबसे भडा भागू बाक़ी सब ने ते गीलास खाली करे पण ये तो बिना बात सुने ही गधी चढ़ग्या ।

एक एक ढक्कन और डालो फेर सुनो लंगडों।

बाईबील के टेम से माईकिल के टेम तक यही झगडा चाल रया था के आदमी आदमी, की ले तो गुनाह है के नई ? इब आपणे देश में भी बात साफ़ हूगी के इब मरद के ऊपर दूजा मरद होवे तो उसको अपराध ना समझा जाके मातर मुर्गे के ऊपर मुर्गा समझा जावे, थम चूतियों को याद नहीं राजकपूर ने इक गाणा फिलम में धरा था, तीतर के आगे दो तीतर, तीतर के पीछे दो तीतर... इब समझे

सोनी साला दांत काढ के बोल्या थम सब न्यूं ही गांडू होए जा रए हो साब वे तीतर आगे पीछे थे ऊपर नीचे नहीं।
साब ने बात खटक गी " रे लंगड़ तूं मेरे से राजी हो जा कल फेर बाबू बुला के लावेगा पुलीस फेर न्याव केवेगा की पुलीस ने अत्याचार करा है, दो पीयार के पंछियों को अपराधी ठहराए जाने का ये मामला ढाई ढूस किया जाता है और सलाह दी जाती है के आयन्दा ऐसे काम में खलल डालने और हतोत्साहित करणे पे कड़ी सजा दी जावेगी "
न्यूं तो रगडा पड़ जावेगा भागू ने घर जाणा नी और भाभी ने किसी को घर आन देणा नी।

रे सर फुटवल्ल हूगी, भागू ने जूत की धर दी।

ईच
बीच बचाव में घणा टेम नी लाग्या गीलास की सौगंध पे पाल्टी फेर जमगी ...

इब आंख्यां तक आगी तो सोनी संजीदा होके बोल्या साब है तो ग़लत, समाज भ्रष्ट हो जावेगा लड़के बरबाद हो जावेंगे। इस्सका कोई फायदा नई।

सुण,
काल तक रामगोपाल्यो अर रघुवीरियो साथ-साथ ड्यूटी के लिए भेन के युनियन बाजी करते थे। आज मैंने पूछा के भाई तुम भी तो दोनों उस तरीके के तो नहीं हो, मरगे साले शरम से, इब इस जीरो हेड पे ड्यूटी का कोई संकट नहीं होगा, थम समझते हो के न्याव करण आले समझते नहीं।

भागू एस ज्ञान भरी बात के पूरा होने से पहले ही लुढ़क ग्या था सोनी ने घर की याद आगी तो उठ गया उसके बाद साब अर बाबू निकल पड़े छिन्न मस्ता के दरवाजे, रे ग़लत ना समझियो कोई
सिर्फ़ पीण वास्ते...ई ?


उसकी आमद का ख़याल

शाम और रात के बीच एक छोटा सा समय आता है। उस समय एक अविश्वसनीय चुप्पी होती है। मुझे कई बार लगता है कि मालखाने के दो पहरेदार अपनी ड्यूटी क...