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इस बात का एतबार नहीं है...

तुम लौटा नहीं सकते

तुम भी देखना उचक कर...

है कुछ ऐसी ही बात...

मुझे आदत है, घरों में झांकते हुए चलने की

उदास किराडू और थार फेस्टिवल

खोये हुए सफ़र का एक लम्हा

आ कि तेरी जेब में रखूं...

तामीर में शामिल एकाकीपन...

उदासी, बहुत सारी बेसबब उदासी...

ओ लड़के...