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तेरे वास्ते

अक्सर

जैसे दो लोगों के बीच कुछ बचा न हो.

मैं क्या कहता उसको?

धुएं के नीम नशे में स्वप्न

चुड़ैल तू ही सहारा है

अपने जानने से परे

वजह कुछ भी हो सकती थी

भाग जाने के मौसम की याद

कोई ज़रूरी है कि सबकुछ कहूँ?

वह उसी औरत में ढल गया