July 28, 2010

मैं कब ज़िन्दगी को तरतीब में रखना सीखूंगा, एंथनी !


एंथनी हट्टन होता तो इस समय कोई स्पेशल डिश बना रहा होता. उस डिश को खा चुकने से पहले ही उससे एक साल बड़ी कैली शेपर्ड उसे अपनी बाँहों में कस कर मार डालती या फिर शायद वे देर तक आईस हाकी खेलने जैसा नृत्य करते हुए थक कर चूर हो रहे होते. हो सकता है कि कैली कहती "एंथनी तुम फायर मेन क्यों बन गए हो, तुम उस लाल रंग की कठोर टोपी के नीचे से हरदम जागती आँखों से मेरे सिवा सब के बारे में सोचते ही रहते हो." एंथनी के पास सब बातों के जवाब रहे होंगे, पता नहीं उसने कैली को दिये या नहीं.

एक लाल रिनोल्ट ने उस बीस साल के नौजवान सायकलिस्ट एंथनी हट्टन को कुचल कर मार दिया था. दुनिया में सड़क हादसों में बहुत लोग मरते हैं किन्तु एंथनी अनमोल था.

दो महीने पहले तेरह एप्रिल के दिन सैंतालीस साल के रसेल हट्टन अस्पताल के बाहर खड़े हुए एक टीवी चेनल से बात कर रहे थे. मैं उस हतभागे को सुनता हुआ रोने लगा. एक पिता अपने बेटे की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए खड़ा था. वह अपने बेटे के अंगों का दान किये जाने की कार्रवाही में सहयोग कर रहा था. "वह चाहता था कि अगर मुझे कुछ हो जाये तो मेरे शरीर के सभी उपयोगी अंगों को जरुरत मंद लोगों को दान कर दिया जाये." एक हिचकी के बाद और रुलाई फूटने से पहले उसकी माँ कहती "वह सिर्फ ग्रेज्यूएट ही नहीं वरन अच्छा शेफ था लेकिन उसने इस पढाई के पूरा होते ही फायर सर्विसेज को सेवा देने की ठानी. वह हमारे घर का सबसे योग्य और सुंदर बच्चा था." फिर वह कहती "मैं उससे बहुत प्रेम करती हूँ..." इसके आगे उसके पास शब्द नहीं थे.

वह इस जुलाई के महीने में अपना इक्कीसवां जन्मदिन मना रहा होता और अपनी इस बात पर अडिग रहता " 'I would rather live the life I do for two days than live a long life and be bored." एंथनी ने ज़िन्दगी के लिए सारी तैयारी कर के रखी थी और मरने के बाद की भी... मैंने अभी तक कुछ नहीं किया है.

सोचता हूँ कि बीस साल की उम्र में वह कितना सुलझा हुआ था और मैं ? कल रात से बहुत उदास हूँ. एक पुरानी दोस्त जो किसी सूरत में पिछले दस सालों से दोस्त नहीं है. उसे भूल जाना चाहता हूँ. मेरी चाहतें नास्तिकता की हद से भी आगे की और बहुत असामाजिक है. मैं कुछ ऐसे जीता आया हूँ जिसे ईमान वाले धोखा कहते है, मैं कहता हूँ कि राहत है ... आज एक मित्र ने कहा है, खाली एक दम खाली हो जाना कभी कभी बेहद ज़रूरी... काश ये मेरे पास बैठ कर कहा होता ?

उसकी आमद का ख़याल

शाम और रात के बीच एक छोटा सा समय आता है। उस समय एक अविश्वसनीय चुप्पी होती है। मुझे कई बार लगता है कि मालखाने के दो पहरेदार अपनी ड्यूटी क...