नहीं लौटना चाहता हूँ दम तन्हा

उन दो मामूली लोगों के लिए जिनकी याद में कीमती लोगों के मुंह पर थूकने को जी चाहता है


हाँ उनके ही लिए बहुत सारे दुख उठाने होंगे लोगों को
हाँ उनके ही खातिर, अगर आप करते हैं प्रेम अपने लोगों से।
इस वक़्त, अपना हाथ उठाना वे लोग
सिर्फ वे जो कह सके कि मैंने क्या बोया है
क्या खो दिया इस कोशिश में
किस तरह से लड़ा हूँ इसके लिए
सिर्फ उन्हीं के दिलों को हक़ है इज़्ज़त से सर उठाने का।

मुझे प्रेम है अपनी मातृभूमि से
मैं बहता हुआ आँसू हूँ, उन सिपाहियों के लिए जो न आ सके लौट कर
मैं हिकारत से देखता हूँ उन लोगों को जो उनके न लौटने की नाजायज वजह बने

कि मुझे नहीं खेला जाता आस्तीन के साँपों के साथ
कि ये कमजोरी है मेरे जींस के साथ आई है
कि मैं नहीं गया कंधार, मैंने नहीं गाया, कोई गीत आगरा का
कि मैं खराब हूँ किसी धतूरे के बीज की तरह, किसी बीज के बीच के लाल रंग की तरह
कि एक दिन हथियारों के खिलाफ हम लड़ेंगे सब्ज़े के लिए
कि एक दिन....

दुआ करूंगा कि रास्ते में न मिल जाएँ उन सिपाहियों के बच्चे
कि नहीं लौटना चाहता हूँ दम तन्हा, मैं अपने घर। 


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