Best seller - A collection of stories written by Kishore Choudhary : The second edition


These stories comprise a world revolving around the relationship between man and woman. What keeps the reader glued to the stories is the writer’s way of rendering the ‘normal’ day-to-day incidents with unconventional metaphors and images, leaving the reader overwhelmed. The characters and situations evolving out of these incidents, however, do not turn these stories into mere escapist fantasies, but pull the reader towards themselves, painting a live picture of all the characters—creating a sense of déjà-vu.

The stories do not seek perfection in human lives by passing judgments of any kind, but encompass the complexity of the minutest of human emotions, weaving a melancholic but realistic face of life. The protagonists, often caught in a web of life—in the strands of love, lust and emotions, keep going to-and-fro, tossing like a boat on the waves of their physical and sentimental world.

The stories run in a style which is poetic in narration, carrying the knowledge that rises after experiencing the adversities of life. This not only compels the reader to read the stories uninterrupted on his computer’s screen, but also hold the writer accountable for hypnotizing him with his words.





अहा जिंदगी 

नई किताब

सच की कहानियाँ 

कहानी संग्रह चौराहे पर सीढ़ियाँ वर्ष 2012 की बेहतरीन किताबों की सूची में शामिल है। अपनी पहली ही किताब से नया कीर्तिमान स्थापित करने वाले किशोर चौधरी के इस संग्रह में चौदह कहानियाँ हैं। सभी में शुरू से अंत तक बांधे रखने का भरपूर सामर्थ्य है। हर कहानी का अपना रंग है। जो बहुत गहरे तक आपने मन पर अपनी छाप छोड़ जाता है क्योंकि कहानियाँ आपके आस पास की और अपनी सी लगती हैं। इन कहानियों की सबसे बड़ी खूबी है भाषा और शैली। किशोर चौधरी बहुत ही सरल शब्दों में नायक या नायिका के भावों को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि हर पात्र से हमें खुद को जुड़ा होने का का अहसास होता है। हर कहानी अपने आप में एक स्वतंत्र लोक है।...  हर कहानी कभी कविता सी बहती नज़र आती है तो कभी अपना अलग शब्द संसार गढ़ती नज़र आती है। सूक्ष्म से सूक्ष्म अनुभूतियों को इनमें मार्मिक अभिव्यक्ति मिली है। भिन्न भिन्न सामाजिक स्तर के प्रसंगों और अनुभवों से बुनी गयी यह कहानियाँ जीवन का एक अद्भुत कसीदा जड़ती है। इन में घर परिवार के जीवन को यथार्थ के साथ अंकित किया गया है। इन कहानियों को पढ़ने के बाद बार बार पढ़ने को जी चाहेगा। कहानियों के जाने कितने अंश दिल में समेट लेने की लालसा जगेगी। किताब की अधिकांश कहानियों में कभी आप अपने आपको देखनेगे कभी अपने कभी अपने जाने पहचाने चेहरों को। इन कहानियों की बुनावट और अंत भी सहज, लेकिन अप्रत्याशित होता है कुल मिलकर इस संग्रह के बारे में यह कहा जा सकता है कि इसकी सभी कहानियाँ आनंद देने वाली हैं। 


दैनिक जागरण

साप्ताहिक पुनर्नवा 

पुस्तक चर्चा - आभासी जगत की कमसिन प्रेम कहानियाँ 

किशोर चौधरी आभासी जगत के कथाकार हैं। किसी भी पत्र पत्रिका में कभी भी इनकी कहानियाँ नहीं छपी परंतु इनकी चौदह कहानियों का संकलन "चौराहे पर सीढ़ियाँ" आश्चर्यजनक ताज़गी और सौंदर्यबोध से पाठक को मोहविष्ठ कर लेता है। नितांत खुरदरे यथार्थ से टकरा कर लहूलुहान होती संवेदनाओं के ताने बाने से रची गई प्रेम कथाएँ जैसे मन में रूमानियत का मीठा अमल घोल देती है। इन कहानियों में भाषा संबंधी अद्भुत प्रयोग दृष्टव्य है जैसे "रात पखावज सी बज रही थी" या "सूखे पुदीने जैसी स्मृतियाँ थी। जिंदगी की चाक स्नेहा के स्पर्श से और भी गीली हो गयी थी।"

यदि आप किशोरवय की कलुष से अछूती, भोली भाली प्रणय अनुभूतियों में डूब जाना चाहते हों तो ये किताब अवश्य पढ़ें। निराश नहीं करेगी।

[श्री राजेंद्र राव] 

Reviewes for Chaurahe par Seedhiyan

A remarkable story collection

This wonderful story collection takes readers in an exceptionally joyful voyage of a colorful cosmos of human feelings and emotions. Writer constructs a multifaceted world of human psyche which consists of various emotions and feelings like love, happiness, desire, lust, hate, greed, anxiety, apathy, jealousy, pain, melancholy, pity, stress, confusion, angst, guilt and compulsions etc. This world is carefully conceived, crafted, weaved and enriched with literary endowments by Kishore. In the labyrinths of castles of these emotions anybody would love to get lost in. To walk on the lanes of this world is an unparallel experience. Most of the stories explore the very complex and convoluted psychological world lying between man and women of our time. Writer observes, experiences and perceives his surrounding very deeply. He sees something which is hidden, something which is not spoken but happened right within and beside us. KIshore’s pristine style of narration holds the unique capability to capture the unexpressed. This man can make Intangible entities which form the complex psychological world of ours speak, play, sing and dance. His words are like beautiful butterflies flying in the garden of emotions; his language is as adorable as colors playing on the canvas. His literary craft is just superb. Writer’s unique proficiency of expressing the subtlety of emotions through beautifully crafted imagery is something which will keep you reminding about him for a very long time. His skillfully crafted metaphors are so powerful that even non-living things and simple natural processes start pulsating with emotions and are forced to behave like characters of a play to communicate the feeling and emotions. In a time when repetition and imitation are not very unusual literary habits, Kishore breaks the ‘prison of prevalence’ at the level of language. He comes to us with an unfermented and pristine language. Gargiputra - Infibeam store 


A masterpiece waiting to sweep off the Hindi literary world...

if words and their composition have any kind of hypnotism power, Kishore Chaudhary certainly knows how to use it. Well, he has got mastery on this power and this first of his many upcoming story-books "Chaurahe Par Seedhiyan" is one hell of an example of this mastery...

I am a big fan of his writing since last four years or so and must have requested him thousand times to get his stories published, but this shy freind of mine wouldn't bother.Thanx to "Hind Yugm", finally the book is out and now the rest of the world will get to know KC's magic which have been wooing us for so long.just two days back, the book has been delivered on my door steps in superb binding and eye-catching cover...have started going through slowly lingering here n there, cherishing the flair, the poetic contrast of an otherwise lyrical prose as most of the stories have already taken me to an awestruck-mesmerised state of mind long back on his blogs. Whoever is reading through this review, JUST TRUST ME...CLOSE YOUR EYES AND PLACE THE ORDER...and then thank me :-) 

wish you all the best KC...and i am more than sure that "chaurahe par seedhiyan" is going to create some new kind of publishing history for Hindi literature...just wait n watch ! Gautam Rajrishi - Flipkart 

दिल को छू लेने वाली कहानियां, चौराहे पर सीढ़ियाँ..

‘चौराहे पर सीढ़ियाँ’ किशोर चौधरी जी की पहली किताब है, लेकिन पढ़ते हुए ऐसा लगा जैसे किसी महान लेखक की किताब पढ़ रही हूँ, ये किताब मेरे बुक शेल्फ की शोभा बढ़ा रही है, जहाँ पहले से बड़े बड़े लेखकों जैसे फणीश्वर नाथ रेनू, मुंशी प्रेम चंद, भगवती चरण वर्मा और धर्मवीर भारती जी की किताबें रखी हैं, किशोर जी की हर कहानी हमें एक अलग ही दुनिया की सैर कराती है, सरल शब्दों में वो नायक या नायिका के भावों को इस तरह प्रस्तुत करते हैं, के हर एक पात्र से हम खुद को जुडा हुआ महसूस करते हैं, हर कहानी शुरू से अंत तक बांधे रखती है, अगली किताब का इंतज़ार है. Nirja Kumari - Flipkart 

चौराहे पर सीढिया.....चढ़ते जाइए.....चाँद पर पहुंचना तय है.

बेहतरीन पुस्तक......एक बार हाथ में लेने के बाद आप रख नहीं पायेंगे.किशोर चौधरी बधाई के पात्र हैं इस सुन्दर पुस्तक ने सृजन के लिए... हर कहानी अपने आप में एक अलग संसार समेटे हुए.....एक अलग रंग लिए हुए.....कभी तो ये भी लग सकता है कि क्या ये सभी कहानियाँ एक ही लेखक की हैं??? अरसे बाद ऐसी उत्कृष्ट हिन्दी कहानी संग्रह हाथ आया है......आपके हाथ आएगा तो आप भी यही कहेंगे. शुभकामनाएँ. अनु Anulata Raj Nair - Flipkart 

Excellent

चौराहे पर सीढियां.....हर सीढ़ी धीरे धीरे मन में उतरती जाती हैं.....हर कहानी में गुम सी हो जाती हूँ बस....मन करता हैं बस बार बार पढते रहो....सच में किशोर जी कलम में जादू सा छा जाता हैं.....मन के भीतर तक समां जाती हैं किशोर जी लेखनी..... :-)

A review by Rajendra Rao, Literary Editor, Dainik Jagaran

प्रिय शैलेश भारतवासी जी,

आपके द्वारा कृपापूर्वक भेजा गया कथा संकलन 'चौराहे पर सीढ़ियां' मिला।आपके पत्र में दी गई जानकारी से चकित होकर इसे पढ़ना शुरू किया तो ऎसा मन रमा कि पढ़ता चला गया।इस पढ़त में कभी तो धारोष्ण कच्चे दूध जैसा स्वाद मिला तो कभी खट्टी कैरी जैसा।इससे पहले मैंने कभी किशोर चौधरी का नाम नहीं सुना था लेकिन इन कहानियों ने अपनी संरचना और टटकी हुई धारदार भाषा से लगभग मोहाविष्ट कर दिया।इनमें गजब की ताजगी और कमनीयता है।यह सचमुच आश्चर्य का विषय है कि यह खूबसूरती से पल्लवित हो रही प्रतिभा अभी तक प्रकाश में क्यों नहीं आई है।आभासी संसार बहुत क्लीनिकल और सेनिटाइज्ड है।इसमें जीवन के ताप से झुलसी त्वचा वाले कठोर पाठक कम हैं।मेरे विचार से किशोर चौधरी को हिंदी के रंगमंच पर अवतरित होना चाहिये।मैं भी अपने ढंग से प्रयास करूंगा। इस किताब से रू ब रू कराने के लिए आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।

राजेन्द्र राव
साहित्‍य संपादक:
दैनिक जागरण पुनर्नवा

Chaurahe par seedhiyan : Available at all leading online stores 


About the author 

Kishore Choudhary is a writer and Radio Broadcaster from Barmer (Rajasthan). He may be living in a far-off place like Barmer (Rajasthan), but he has followers not only within the country, but also abroad. Through his two blogs, he has reached far and wide, 

Kishore is a classic example of what online media can do as a tool of communication, when you are practically sitting in the farthest end of the country, with no access to literary festivals and the likes. Kishore has created his fan following base purely out of his blog and he now has wide reader base coming to his blog from all across the globe. 

With simple yet unique metaphors drawn from the culture and place he belongs, Kishore writes about feelings that are universal - love, pain, loss, fear, loneliness, companionship, hope and fantasy. His stories are that of longingness, of relationships gone awry, of heartbreaks and betrayals, and yet there is a sense of hope and life that continues to flow. 

Most of the readers and followers that he has are from far-flung places and Tier II cities, who would want to read him but wouldn't know how to. Not only that, he has a wide listener base also, which is awaiting his work to be published. Kishore's columns in local newspapers of Rajasthan are immensely popular, and he is a known name in the literary circles. 

If his collection of short stories are available online, it is sure to find to many takers from across the Hindi hinterland. The number of followers on Facebook and the two blogs that he has stand testimony to that.
[Anu Singh Choudhary : Film maker, Journalist]


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