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तेरे भीगे बदन की खुशबू से

काश, इतना सा हो जाये

मदहोशी में, होश है कम कम

कौन गुज़रा था अभी..

दुखों पर ही अपना घर...

सितमगर कभी तेरा यूं देखना

तपते दिन में गीली जगह

ख़यालों की छाया का नाच

वह दिन कभी नहीं आएगा

कभी सोचो इस तरह

एक दिन सब कुछ हो जाता है बरबाद