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तोन्या, चाईल्ड मोलेस्टेशन और मेरा विचलित विश्वास

तोन्या, अब तुम हर आरोप से बरी हो मगर तुम्हारे मुकदमे की राख से उड़ते हुए कई सवाल मेरी पेशानी की सलवटों को मैला कर जाते हैं. चाइल्ड मोलेस्टेशन और सेक्स अब्यूज के बाईस आरोपों से संभव था कि तुम्हें चार सौ साल की कैद की सजा सुना दी जाती. दुनिया के कई विचित्र या अतिसामान्य मुकदमों की फाइलों के साथ तुम्हारी भी गहरे भूरे रंग वाली फ़ाइल किसी न्यायालय के रिकार्ड रूम में रखी रहती और उसका अंत दीमकों के चाट जाने से होता मगर प्रस्तर-अरण्यों के निर्माण से सभ्य होने में जुटे लोगों के हाथ इस बार भी एक विद्रूप प्रश्न लगा है.

इस पर बहुत बहस हो गयी कि पाश्चात्य देशों में छोटे बच्चों के पड़ौसियों, स्कूल के सहपाठियों और माता-पिता के परिचितों के यहाँ रात को सोने की परंपरा का हासिल क्या है ? इससे बच्चे किस तरह की दुनियादारी सीखते हैं या उनके पेरेंट्स को बच्चों की अनुपस्थिति में कितना खुला आकाश मिलता है ? हमने शिक्षित और विकसित होने का जो रास्ता चुना है उस पर हम एक कदम आगे और दो कदम पीछे जा रहे हैं. जोर्जिया ही क्यों, किसी भी देश के किंडरगार्टन स्कूल की शिक्षिका पर अपनी बेटी सहित दो और छोटी लड़कियों को घर में पीट कर 'बैड गर्ल' बनने को विवश करने और उनके साथ रात को सोने के दौरान वयस्क शारीरिक मैथुन क्रिया सदृश्य हरकतें करना कभी स्वीकार नहीं किया जा सकेगा. ऐसा है तो यह एक मानसिक व्याधि है.

न्यायाधिकारी के समक्ष पुलिस डिटेक्टिव द्वारा प्रस्तुत तुम्हारी सगी बेटी के रिकार्डेड बयान में पूछे गए प्रश्नों को सुन कर मैं विचलित हो उठता हूँ. मेरी माँ मुझसे इन दिनों बहुत दूर रहती है मगर मैं सोच रहा था कि पूछूं "माँ तुम जब अपनी सात साल की बेटी को नहलाती हो तब कहाँ कहाँ से छूती हो ?" मुमकिन है कि मैंने दुनिया नहीं देखी है इसलिए मुझे इस सवाल पर आपत्ति हो रही हो मगर ऐसा सवाल सोचने के लिए भी मेरा असभ्य मन शर्मिंदा है. कैसे कोई माँ से पूछे ?

मैं बीएसएफ के किंडर गार्टन स्कूल में पढ़ा करता था. आवासीय परिसर में बनी स्कूल में पहुँचने के लिए एक बड़ा दरवाजा था जिस पर हरवक्त पहरेदार और एक बिल्ली रहा करती थी. मुझे उस बिल्ली से बहुत डर लगता था लेकिन स्कूल में किसी से नहीं. उस स्कूल की एक टीचर मुझे याद है मिसेज रंधावा. वह मुझे एक गुलाबी कुरते में ही स्मृत होती है जिसकी की बाहें चूहे ले गए थे. रंधावा मेम की याद इसलिए है कि वह गोल मटोल बच्चों को पकड़ लिया करती थी और उनको इतने बोसे देती थी कि बच्चे कभी फिर से पकड़ में नहीं आना चाहते थे. मुझे उन्होंने कभी नहीं पकड़ा इसलिए बाल मन इस तरह के अनुभव को किस तरह नोट करता है कह नहीं सकता पर इतना यकीन है कि वे बहुत पवित्र रही होंगी.

बच्चों के साथ शालीनता से व्यवहार होना चाहिए, वे बेहद नाजुक हुआ करते हैं मगर क्या वयस्क दुनिया की धूप में तप कर कठोर हो जाया करते हैं ? मैं समझता हूँ कि इस तरह के मुकदमे जिसमे एक औरत से उसकी नौकरी, मकान, बच्ची छीन ली जाये और उसे जेल के सींखचों के पीछे से अपने टूटे हुए ह्रदय से मेरी बच्ची लौटा दो की गुहार लगानी पड़े फिर दो साल तक चिकित्सकों की रिपोर्ट को कभी सस्पीसियश और कभी नोरमल बताया जाता रहे फिर उस औरत के घर के आगे न्यायालय द्वारा सुनवाई की जाये फिर पड़ौसी तोन्या के चरित्र को उत्तम बताते हुए समर्थन जताएं और आखिर में माननीय न्यायालय सब तथ्यों की बिना पर दो साल से रेहन रखे स्त्री चरित्र को साबुत लौटा दे.

तोन्या तुम शराब कम पिया करो, यह मेरा निजी अनुभव है कि शराब भावनाओं को इस कदर आलोड़ित करती है कि वे बे-लगाम हो जाया करती है. तुम पर जो गंभीर आरोप लगे थे उनकी छाया में तुम्हें किसी मनो चिकित्सक से जरूर मिलना चाहिए ताकि माँ के बारे में हमारी धारणाएं जितनी पवित्र और कोमल हैं, बची रहे. वैसे यह मुक़दमा मेरे देश में चलाने लायक नहीं है क्योंकि यहाँ हर माँ, दूसरी माँ पर लगे इस तरह के आरोपों को प्रथम-दृष्टया ख़ारिज कर देती है.

[ तोन्या क्राफ्ट जोर्जिया की किंडर गार्टन स्कूल की पूर्व शिक्षिका है, दो साल चले इस मुक़दमे का फैसला दो सप्ताह पहले आया है. ]

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नष्ट होती चीज़ों के प्रति

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यही हाल रिश्तों का है। लोग बचाने की पवित्र जुगत में ख़ुद को नष्ट करते जाते हैं। मुझे अब तक केवल ये समझ आया है कि नष्ट होती चीज़ों के प्रति उदासीन रहो। और कोई हल नहीं है।

भूल जाओ

कोई इतना पास से गुज़र जाए और देख न सकें उसकी सूरत तो दिल उदास हो जाता है। धूप के तलबगार छोटे छोटे दिन आने को हैं ताकि याद की लंबी रातों में की जा सके अतीत की लंबी जुगाली। और बहुत सारी बेवजह की बातें। 
भूल जाओ
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वो बबूल का एक नुकीला कांटा था।

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* * *

ये रंग
तुम्हारी अंगुलियों की
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इसलिए मेरी जिज्ञासा का रंग सलेटी है
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विवेक से भरे दुख
और ईश्वर के बीच की दूरी बहुत कम होती है

इसलिए तुम कहीं मत जाओ।  * * *
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दो कदम और चल सकें तो  मिट सकता है भरम  कि ईश्वर कोई चीज़ नहीं होती, दुख भी कुछ नहीं होता।
* * *

मेरी नास्तिकता पर  तुम्हें दया आ सकती है
हो सकता है कि तुम मेरा सिर भी फोड़ दो।

मैं अगर तुमसे प्यार करता हूँ, तो इसके सिवा कुछ नहीं कर सकता।
* * *
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प्रेमी रो सकता है, उस दुख से भी…