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हथकढ़
[रेगिस्तान के एक आम आदमी की डायरी]
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May 25, 2011
आग के पायदानों पर बैठी स्वर्ण भस्म
May 20, 2011
औरत की जगह
May 18, 2011
तेरी ही तरह सोचता हूँ कि गुमख़याल हूँ.
May 16, 2011
वह एक भयंकर ईश्वर था.
May 11, 2011
टिमटिमाती हुई रोशनियों में
May 06, 2011
तेरे खाके भी मेरे पास नहीं रह सकते...
May 01, 2011
जली तो बुझी ना, कसम से कोयला हो गयी हाँ...
April 25, 2011
सब अक्षर धुल जायेंगे...
April 11, 2011
बस ख़ुदा का शुक्र है...
April 01, 2011
ऐ दुनिया, अपनी दुनिया ले जाओ...
March 24, 2011
कितनी ही बातें, तेरी खुशबू की याद दिलाती है
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