Posts

असंयत उद्विग्न

एक रोज़ तुम्हें मालूम हो

लगा लो होठों से

पार्टनर तुम आबाद रहो.

एक जुगलबंदी को

कासे में भरा अँधेरा

चल दिए सब चारागर

जाने किसी और बात की

केसी, क्या हो तुम?

दिल उदास तो नहीं मगर

तुम पुकारना