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कुछ बनाने का वहम

मेटाथिसियो फोबिया - जड़प्रिय मन

कुछ देर के लिए

अमलतास के पीले गीत

पीले पन्नों के झड़ जाने से पहले

घसियारा मन

हरे पेचों को छूकर आती हवा

बाक़ी कामों से भरी जिंदगी

वो जो दिल ने सोचा

तुम्हारी नियति

फूलों का मौसम न था