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ये कैसा वादा था कि...

विलायती बबूल

ऐसी भीगी सुहानी रात में

मुख़्तसर ये कहना...

मेहरुन्निसा ख़ाला, आप बहुत अच्छा लिखती हैं...

थोड़ी सी शराब और बहुत सा सुकून बरसे...

घर से भागी हुई दुनिया

गलियों की लड़की मैगी और रेत में मशालें

पेंसिलें

खेत में धूप चुनती हुई लड़कियां

और अब क्या ज़माना खराब आयेगा