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हथकढ़
[रेगिस्तान के एक आम आदमी की डायरी]
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August 02, 2012
मेरी मुट्ठी में सूखे हुए फूल हैं
July 13, 2012
देखा तो पाया कि शाम है
July 10, 2012
मिटा तो न दोगे ?
July 08, 2012
जबकि न था, कभी कोई वादा
July 06, 2012
रीत रहा है, फूटा प्याला
June 28, 2012
कुछ शामें भूलने लायक नहीं होती
June 24, 2012
तुझको छू लूं तो फिर ऐ जान ए तमन्ना
June 19, 2012
बारिशें, तुम्हारे लिए
June 17, 2012
तेरे भीगे बदन की खुशबू से
June 16, 2012
काश, इतना सा हो जाये
June 11, 2012
मदहोशी में, होश है कम कम
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