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हथकढ़
[रेगिस्तान के एक आम आदमी की डायरी]
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बातें बेवजह
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May 15, 2020
रोटी एक पहिया हो गयी है
February 29, 2020
न कहने सी बात
August 08, 2015
कहाँ है तुम्हारी प्रेमिका
June 15, 2015
जून के सात दिन-रात
August 06, 2014
कुछ एक अपवादों को छोड़कर
July 10, 2014
कई बार - डायरी दस दिनों की
December 18, 2013
कोई चरवाहा भी न रखे
November 13, 2013
आतिशदान के भीतर की गंध
October 17, 2013
साये, उसके बदन की ओट किये हुए
September 29, 2013
कमर पर बंधी है कारतूसपेटी
September 23, 2013
रेगिस्तान का आसमान अक्सर
September 04, 2013
शाम के झुटपुटे में
July 18, 2013
मैं उस रोशनी में जाकर क्या करूंगा
July 14, 2013
और कुछ याद, दाल और तुरई की
July 03, 2013
एक मरा हुआ आदमी कई बार सचमुच मरा हुआ नहीं होता है।
June 24, 2013
तस्वीर अधूरी है मगर मिटी तो नहीं है
May 26, 2013
सन्यास की चाशनी में वियोग की धुन
May 15, 2013
जिजीविषा के आखिरी छोर पर
May 12, 2013
परछाई की गंध
May 06, 2013
मार गिराता हूँ दिन और रात
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