August 21, 2019

तुमने मेरे लिए कुछ किया था

ये लोहे का जाल लगाया तब इसके साथ मालती, जूही, अमृता, रातरानी और अपराजिता की लताएं भी लगाई थी। अपनी गति से लताएं बढ़ती गई हैं।

अमृता ने बेहद तेज़ गति से पूरे जाल को हथिया लिया है। इसलिए जाल का एक कोना खाली करना पड़ा। अमृता को हटाया ताकि मालती चढ़ सके। उसे धूप मिले।

जीवन में कभी कोई सम्मोहन, लालच, चाहना हमको इस तरह ढक लेती है कि बाकी सब बातें मिटने लगती हैं। हम उसी के अधीन हो जाते हैं। जीवन एकरस हो जाता है। एकरसता से ऊब होती है। ऊब से उदासी आती है। उदासी कभी हमको हताश भी कर देती है।

कभी किसी को अपने जीवन पर इस तरह न पसरने देना कि केवल वही रह जाए। वह मन पर एक अंधेरा कर दे।

नए लोगों से मिलना, कलाओं के संसार से संवाद करना, अकेले बैठना, सिनेमा जाना, किताबें पढ़ना, गलतियां करके न पछताना जैसे अनेक काम करते रहने की जगह जीवन में बची रहनी चाहिए।

जिस काम में आंखें मूंद कर डूबे हो, एक रोज़ वह काम ये मानने से इनकार कर देगा कि तुमने मेरे लिए कुछ किया था।

शुक्रिया। ❤️

August 20, 2019

कोई खोया हुआ शख्स

बढ़ई का रणदा था. जब भी दिल पर कोई दाग़ लगा, दिल को छील कर नया कर लिया. एक मोची वाली सुई थी, दिल में छेद करके, दिल को सी लिया. मोहोब्बत के सितम की कड़ी धूप में दिल सूखने लगा तो कच्ची शराब थी, उसमें भिगो कर रख दिया. दिल बरबाद तो हर तरह से हुआ मगर किसी न किसी तरकीब से उसे मरने नहीं दिया.

एक दोस्त ने कहा- "केसी दिल की बातें अक्सर जुबां तक आते-आते टूट जाती हैं. कुछ पोशीदा बातें कहने का जरिया होना ही चाहिए." मैंने कहा- "बातें दिल में पड़ी रहे तभी तक अच्छा. ग़ालिब के सलीके में ये बात कुछ ऐसी है कि मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में."

दरअस्ल मैं क्या हूँ? ये मैं ख़ुद नहीं जानता हूँ.

मेरी प्रोफाइल में छांटकर लगाई चंद तस्वीरें देखकर. मेरी कही कुछ कहानियां पढ़कर. मेरी डायरी में लिखे ज़िन्दगी के कड़वे, खट्टे और नंगे शब्दों से दो-चार होकर किसी ने अपने आप को कहीं खोज लिया होगा. कोई खोया हुआ शख्स याद आया होगा. कच्चे दिनों में लिए बोसे का निशाँ फिर से उभर आया होगा. कोई एक टीस उठी होगी. कभी बदन ने थककर ख़ुद को बिस्तर पर इस तरह पटक दिया होगा कि ऐ ज़िन्दगी अब तुम्हारा बोझ बढ़ गया है.

दोस्तों की आमद मेरी पोस्ट्स पर हमेशा रहती है. वे गहरी मोहोब्बत से दुआ-सलाम करते हैं. उनको देखकर नए-नए जानने वाले मुझे कोई सेलेब्रिटी समझ लेते हैं. एक ऐसा आदमी जिससे हर कोई मोहोब्बत करता है. अक्सर उनको ये भी लगता होगा कि मेरे इनबॉक्स में महफ़िलें सजी रहती हैं. जहाँ हम बेहिसाब बातें किया करते हैं. ये धोखा भी होता होगा.

असल में जब कुछ एक दोस्त हाथ थामकर चलते हैं. पब्लिक प्लेस पर मुझे गले लगाये खड़े रहते हैं. मुझसे कहते हैं, आपकी अंगुलियाँ चूम लूँ. उनको मेरी कहानियों के किरदारों के दुःख बांधते हैं. एक लम्हे की मोहोब्बत की दुआ में जी रहे पात्र अपील करते हैं. इन दोस्तों को धूप में खिले पीले फूलों, सीढियों की बेबसी, रास्तों के इंतज़ार, स्याह रातों की बेचैन उदासियाँ, दोपहरों के कड़े एकांत अपने पास खींचते रहते हैं.

मैं शायद इतना भर ही हूँ.

किसी की इल्तज़ा नहीं हूँ मैं किसी की फरियाद नहीं हूँ. अगर हूँ तो मैं उसे छोड़कर चला जाता हूँ.

हम अक्सर एक व्यक्ति होते हैं लेकिन सोशल साइट्स हमको संस्था बना देती है. शिकवे आने लगते हैं कि मैसेज पढ़ो तो जवाब दिया करो प्लीज़. लेकिन एक रोज़ आप ऐसे मक़ाम पर आ जाते हैं जहाँ से सबको जवाब नहीं दे सकते. जहाँ से आप किसी का हाथ नहीं थाम सकते. जहाँ से आप किसी को चाहकर बाँहों में नहीं भर सकते. उस समय आपका जीना ख़त्म हो चुका होता है. बस उसी जगह हूँ.

20 अगस्त 2017 की डायरी।

तस्वीर मनोज ने भेजी है।

August 17, 2019

हमारे पास क्या कुछ है?



हमारे पास क्या न था। प्रतीक्षा, एकान्त, उदासी और कभी-कभी हताशा भी। लेकिन हमने इतनी सरल अनुभूतियों को देखा ही नहीं। उन क्षणों में स्वयं से बात ही नहीं की। प्रतीक्षा में थे तो कितना सुंदर था कि किसी के आने के ख़याल में सबकुछ भूल गए है। एकान्त था तो कितना अच्छा था कि हम बहुत बरस पीछे लौटकर अपनी याद से गुम हुए लम्हों की तलाश कर सकते थे। उदास थे तो ख़ुद से बतियाते। क्या चाहिए प्यारे। जब तुम किसी की कामना करते हो तो ये तुम्हारा गुण है, उसका कुछ नहीं है। कितने ही हीरे जब हमारी कामना में नहीं होते तो उनका क्या मोल होता है। हताशा इसलिए थी कि हम एक नई शुरुआत कर सकें। सब कुछ नया। लेकिन हम कब उन चीज़ों, सम्बन्धों और साथ की कद्र करते हैं, जो हमारे पास होता है।

सोचना, हमारे पास क्या कुछ है? जो भी है, उसे समझोगे तो बहुत उपयोगी पाओगे।

August 16, 2019

परमिंदर

ये हादसा भी होना था।

एक लड़की थी। उसके नाम को बदले बिना स्कूल के दिनों के कहानी लिख दी थी। कहानी पैंतीस साल पहले घटी। उसको लिखा घटना के चौदह साल बाद। किताब छप गयी।

पैंतीस साल बाद अचानक वह फेसबुक पर दिखी। मैं कहानी कहने की ख़ुशी भूल गया। सोचने लगा कि वह कहानी पढ़ेगी तो उसे कैसा लगेगा? मैंने आभा को कहा- "देखो परमिंदर" आभा ने विस्मय भरी आंखों से उसे देखा।

मुझे कहानी याद है लेकिन बेचैन होने लगा। इसलिए कि वह कहानी मैंने जिस तरह समझी और लिखी, उसे परमिंदर कैसे पढ़ेगी? उसे कैसा लगेगा।

रात का पहला पहर जा चुका था फिर भी मेरी पेशानी की सलवटें मानु ने पढ़ ली। वह गयी और कहानी संग्रह ले आई। उसने कहानी पढ़नी शुरू की। मैं भी चाहता था कि कहानी पढ़ी ही जाए। मेरा अपना डर था कि कोई प्रिय हो या अपरिचित हो, उसके बारे में कुछ भी कहना हो, ज़िम्मेदारी बड़ी होती है।

कहानी पढ़ने के बाद आभा और मानु ने कहा। आपने इसमें परमिंदर के लिए तो अच्छा ही लिखा है। आपने कहानी लिखी ही इसलिए है कि कभी परमिंदर मिल जाए तो उसे कहानी के रास्ते बचपन का क्रश याद दिलाया जा सके।

परमिंदर अपने परिवार के साथ खड़ी थी। आभा कह रही थी। उसकी बेटी भी बहुत प्यारी है। मानु के पास अपनी चुहल थी। कहानी के पात्रों के बारे में पूछती कि ये आप हो? वो कौन है? ऐसा सचमुच था?

मैं लेकिन आकाश में तारे देखता हुआ सोचता रहा कि परमिंदर कहानी पढ़ेगी तो क्या होगा?

परमिंदर के इंतज़ार में ठहरा हुआ समय ग्यारहवीं कक्षा की उदास धूल भरी बैंचों पर बैठा रहा। लेकिन अचानक ये क्या हुआ?
* * *

इस तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में लालच, चाहना और कामना से भरा मैं कई लोगों से मिला और बिछड़ा लेकिन उनमें से किसी के भी बारे में छोटी सी टिप्पणी भी न लिखी। इसलिए कि मैं जानता हूँ, लिखे हुए को मिटाया न जा सकेगा। कभी जब हम अलग सोचेंगे, पुरानी बातों पर हंसेंगे तब सम्बन्धों के बारे में लिखा हुआ मिटा देना चाहेंगे, लेकिन कैसे मिटायेंगे?

ग्यारहवीं कक्षा के दिनों की कहानी जब लिखी तब समझ कम थी। समझ अब भी नहीं है कि ये सब लिखकर साझा कर रहा हूँ। लेकिन मैं चाहता हूँ कि मेरे दोस्त ये जानें कि कभी कुछ लिखो तो सोचना कि उसे मिटाओगे कैसे?
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सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.