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आखर पोटली वाले बातपोश की विदाई

आतिशदान के भीतर की गंध

बात, जो अभी तक न सुनी गयी हो.

मौत से भी ख़त्म जिसका सिलसिला होता नहीं.

उधर बकरे क़ुरबान, इधर बारूद

दिल के कबाड़खाने में

वो दुनिया मोरे बाबुल का घर

ये धुंआ सा कहाँ से उठता है.

साये, उसके बदन की ओट किये हुए

फ्रोजन मोमेंट

ज़ाहिदों को किसी का खौफ़ नहीं