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कुछ सबक पड़ोसी से भी लेने चाहिए

रेगिस्तान से किताबों के मेले तक

मोहे चपरासी कर दे

तूँ ही तूँ

विदुषी गार्गी और नव पल्लव

थके हारे बेमजा सिपाही की तरह

तब तक एक बुदबुदाहट है

हम होंगे कामयाब एक दिन

बेआवाज़ बातों की दुनिया की ओर

बाद मेरे कोई मुझसा ना मिलेगा तुमको

मुखौटे